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न्याय

सोनिया मल्होत्रा, जिन्हें कानून की रानी के नाम से जाना जाता है, एक बड़ी लॉयर हैं। वह विधायक लोकेश सिंह के लिए एक केस तैयार कर रही हैं। उधर, उनकी अपनी बेटी दीया और मम्मी रचना को उनकी ही क्लाइंट पूजा सिंह परेशान कर रही है। सोनिया अपनी असली पहचान बताती हैं, लेकिन पूजा को उन पर भरोसा नहीं होता। इसके बजाय, पूजा सोनिया और उनके पूरे परिवार को और भी बुरी तरह से बदतमीज़ी झेलने पर मजबूर कर देती है...
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इस एपिसोड की समीक्षा

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लाल जोड़ी वाली महिला की चीखें

पुलिस वाले उसे पकड़कर ले जा रहे थे और वो बेबसी में चिल्ला रही थी। उसका दर्द साफ दिख रहा था स्क्रीन पर। शायद वो दोषी नहीं है, बस गलत जगह फंस गई है। न्याय की इस दौड़ में अक्सर मासूम लोग पिचक जाते हैं। उसकी आंखों में आंसू देखकर दिल पसीज गया, काश कोई उसकी मदद कर पाता।

मीडिया का तमाशा और सच्चाई

अस्पताल के बाद सीन बदलता है और हम देखते हैं कि कैसे मीडिया एक नई कहानी गढ़ रही है। लाल ड्रेस वाली महिला अब प्रेस के सामने खड़ी है, बिल्कुल शांत। क्या ये वही महिला है जो पहले रो रही थी? या ये सब एक नाटक है? न्याय शो में दिखाया गया ये ट्विस्ट दिमाग घुमा देने वाला है। सच क्या है, ये जानने के लिए मैं बेताब हूं।

नीली ड्रेस वाली महिला का राज

शुरुआत में वो बहुत शांत लग रही थी, लेकिन जैसे-जैसे प्लॉट आगे बढ़ा, उसके चेहरे के भाव बदलने लगे। जब उसने घायल लड़की को गले लगाया, तो लगा जैसे वो उसकी मां हो या कोई बहुत करीबी। न्याय की इस कहानी में उसके किरदार की गहराई सबसे ज्यादा है। उसकी मुस्कान के पीछे छिपा दर्द कोई नहीं देख सकता।

घायल लड़की की मासूमियत

सिर पर पट्टी बांधे वो लड़की जब मुस्कुराई, तो पूरा माहौल बदल गया। उसकी मासूमियत ने सबका दिल जीत लिया। शायद वो ही इस कहानी की असली हीरोइन है जिसने सब कुछ देखा है। न्याय की तलाश में वो अकेली नहीं है, उसके साथ वो महिला भी है जो उसे गले लगाकर रो पड़ी। ये सीन बहुत इमोशनल था।

गंजे आदमी का गुस्सा क्यों?

उसका गुस्सा सिर्फ एक्टिंग नहीं लग रहा था, बिल्कुल असली लग रहा था। शायद उसे लगता है कि उसके साथ अन्याय हुआ है। पर जब पुलिस वाले उसे घेर लेते हैं, तो उसकी बेबसी साफ दिखती है। न्याय की इस कहानी में हर कोई किसी न किसी तरह से पीड़ित लगता है। कौन सही है और कौन गलत, ये पता लगाना मुश्किल है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस का ड्रामा

जब लाल ड्रेस वाली महिला माइक के सामने खड़ी हुई, तो लगा जैसे वो कोई बड़ा ऐलान करने वाली हो। रिपोर्टर्स के सवालों का जवाब देते हुए उसका चेहरा बिल्कुल पत्थर जैसा था। न्याय शो में ये सीन बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यहीं से असली खेल शुरू होता है। क्या वो सच बोलेगी या झूठ? ये देखना बाकी है।

अस्पताल के सीन की रियलिस्टिक फील

अस्पताल का सेट इतना असली लग रहा था कि मैं भूल गया कि ये शूटिंग है। डॉक्टर्स, नर्सेस, पुलिस, सब कुछ परफेक्ट था। खासकर जब वो लड़की उठी और चली, तो लगा जैसे मैं भी वहीं मौजूद हूं। न्याय की इस कहानी में लोकेशन और सेट डिजाइन बहुत अच्छे हैं। ये शो देखने का अनुभव और भी रोमांचक बना देते हैं।

कहानी का ट्विस्ट और टर्न

पहले लगा कि लाल ड्रेस वाली महिला विलेन है, फिर लगा कि वो पीड़ित है। फिर नीली ड्रेस वाली महिला का एंट्री हुआ और सब कुछ उलट-पुलट हो गया। न्याय की इस कहानी में हर एपिसोड के साथ नया ट्विस्ट आता है। ये शो आपको कभी भी बोर नहीं होने देता। हर सीन के बाद आपका दिमाग नई थ्योरी बनाने लगता है।

अंत में मिली उम्मीद की किरण

जब सब कुछ अंधेरा लग रहा था, तभी वो लड़की मुस्कुराई और नीली ड्रेस वाली महिला ने उसे गले लगाया। ये सीन देखकर लगा कि शायद सब ठीक हो जाएगा। न्याय की इस कहानी में उम्मीद की ये किरण बहुत जरूरी थी। वरना तो सब कुछ बहुत डार्क और डिप्रेशन वाला लग रहा था। अब देखना है कि आगे क्या होता है।

अस्पताल का वो डरावना माहौल

जब वो गंजे आदमी ने गुस्से में चिल्लाना शुरू किया, तो मेरी रूह कांप गई। लेकिन नीली ड्रेस वाली महिला की आंखों में जो ठंडक थी, वो किसी विलेन से कम नहीं लग रही थी। न्याय की इस कहानी में हर किरदार अपने आप में एक पहेली है। अंत में जब घायल लड़की मुस्कुराई, तो लगा जैसे सब ठीक हो गया हो, पर क्या सच में?