काले वस्त्रों वाले योद्धा की हार बहुत दर्दनाक लगी। जब उसके मुंह से खून निकला तो सन्न रह गए। लाल धुएं का जादू देखकर हैरानी हुई। सफेद पोशाक वाले की शांति भयानक थी। पिता का बड़ा खेल जैसे शो में ऐसे संघर्ष देखना आम बात है पर यह अलग था। आसपास खड़े लोगों की घबराहट साफ दिख रही थी। बच्चों की आंखों में डर था। यह दृश्य दिल पर भारी पड़ा। सबकी सांसें थम सी गई थीं।
सफेद और काले मिश्रित पोशाक वाले की शांति देखकर डर लगा। उसने बिना किसी प्रयास के विरोधी को हरा दिया। लाल रंग की ऊर्जा हवा में फैल गई थी। पिता का बड़ा खेल की कहानी में यह पल निर्णायक साबित हुआ। जो व्यक्ति जमीन पर गिरा था उसकी आंखों में निराशा थी। दर्शकों की सांसें रुक सी गई थीं। ऐसा लगा जैसे किसी बड़े युद्ध का अंत हो गया हो। बहुत ही तीव्र भावनाएं थीं। यह दृश्य बहुत यादगार बन गया।
इस दृश्य की शुरुआत ही धमाकेदार हुई। जब वह व्यक्ति चीखता हुआ गिरा तो सब चौंक गए। पृष्ठभूमि में प्राचीन इमारतें बहुत सुंदर लग रही थीं। पिता का बड़ा खेल के इस एपिसोड में युद्ध कौशल की कमी नहीं थी। काले कपड़ों वाले ने पूरी ताकत लगा दी थी फिर भी हारा। सफेद पट्टी वाले के चेहरे पर कोई बदलाव नहीं आया। यह शक्ति का अंतर स्पष्ट था। देखने वालों को यह पल लंबे समय तक याद रहेगा। निर्देशन बहुत सटीक रहा है।
बच्चों को भी इस लड़ाई में रुचि थी जो आश्चर्यजनक है। नीले कपड़ों वाले बच्चे की नजरें नहीं हटीं। जब खून बहा तो माहौल गंभीर हो गया। पिता का बड़ा खेल में ऐसे परिवारिक दृश्य भी मिलते हैं। बूढ़े व्यक्ति अपनी छाती पकड़कर बैठ गए थे। ऐसा लगा कि उन्हें झटका लगा है। काले जादू का प्रभाव बहुत गहरा दिखाया गया है। अंत में हारने वाले की हालत देखकर तरस आया। परिवार का साथ भी दिखा।
लाल धुएं का दृश्य प्रभाव बहुत शानदार था। ऐसा लगा जैसे कोई राक्षस जाग गया हो। काले वस्त्रों वाले ने आखिरी कोशिश की पर नाकाम रहा। पिता का बड़ा खेल की कहानी में यह मोड़ बहुत महत्वपूर्ण है। सफेद पोशाक वाले की जीत निश्चित थी। उसकी बांहें बंधी थीं और वह स्थिर खड़ा था। यह आत्मविश्वास ही उसकी ताकत थी। पूरा आंगन तनाव से भरा हुआ था। सबकी नजरें वहीं टिकी थीं। तकनीक का उपयोग अच्छा था।
जब वह व्यक्ति जमीन पर गिरा तो सन्नाटा छा गया। खून की धार देखकर लगा कि चोट गहरी है। सफेद कपड़ों वाले ने बिना कुछ कहे सब कुछ कह दिया। पिता का बड़ा खेल में ऐसे डायलॉग बिना बोले होते हैं। पीछे खड़े शिष्यों के चेहरे पर हैरानी थी। उन्हें अपनी आंखों पर यकीन नहीं हो रहा था। यह युद्ध केवल शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक भी था। हारने वाले की आंखों में सवाल थे। खामोशी शोर से ज्यादा थी।
इस दृश्य में भावनाओं का बहुत बड़ा खेल था। काले कपड़ों वाले की चीखें दिल को छू गईं। लाल ऊर्जा ने पूरा माहौल बदल दिया। पिता का बड़ा खेल के निर्माताओं ने मेहनत की है। सफेद पट्टी वाले की आंखों में ठंडक थी। उसने बिना पसीना बहाए जीत ले ली। यह उसकी तैयारी का परिणाम था। आसपास के पेड़ और इमारतें साक्षी बनी रहीं। यह पल इतिहास में दर्ज हो जाएगा। कलाकारों ने जान डाल दी।
दर्शकों की प्रतिक्रिया देखकर मजा आया। सब लोग अपनी जगह से हिल नहीं पा रहे थे। काले वस्त्रों वाले का संघर्ष व्यर्थ चला गया। पिता का बड़ा खेल में ऐसे उतार चढ़ाव देखने को मिलते हैं। सफेद पोशाक वाले का रवैया बहुत ऊंचा था। उसने अपने विरोधी को नीचा दिखा दिया। जमीन पर पड़ी तलवार भी गवाह थी। यह जीत आसान नहीं थी पर मिल गई। अंत बहुत दुखद था सबके लिए। सीट से कोई नहीं उठा।
जादुई शक्तियों का प्रयोग देखकर रोमांच हुआ। लाल रंग की चमक बहुत तेज थी। काले कपड़ों वाले ने अपनी आत्मा तक लगा दी। पिता का बड़ा खेल की कहानी में यह सबसे कठिन पल था। सफेद कपड़ों वाले ने अपनी शक्ति छिपा रखी थी। जब उसने प्रहार किया तो सब खत्म हो गया। बच्चों को भी यह सब समझ आ रहा था। यह उनकी पहली बड़ी लड़ाई थी शायद। माहौल में गंभीरता थी। शक्तियां आम नहीं थीं।
अंत में जब वह व्यक्ति ढेर हो गया तो सब राहत की सांस ले सकते थे। खून से सना चेहरा देखकर दुख हुआ। सफेद पट्टी वाले ने न्याय किया है। पिता का बड़ा खेल में ऐसे न्याय की उम्मीद होती है। पीछे बैठे बूढ़े व्यक्ति को झटका लगा था। उन्होंने अपनी छाती पर हाथ रखा था। यह जीत केवल एक व्यक्ति की नहीं थी। यह पूरे समुदाय के लिए थी। दृश्य बहुत प्रभावशाली था। सबको राहत मिली थी।