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पिता का बड़ा खेलवां43एपिसोड

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पिता का बड़ा खेल

अर्जुन राठौड़ बाहर से लापरवाह जुआरी दिखता है, पर असल में महान योद्धा है। ससुर देवेन उसे तुच्छ समझकर सिया राठौड़ से अलग कर देता है। वर्षों तक छिपकर साधना करने के बाद, अर्जुन सही समय पर लौटता है। जब विकास सबको हराकर संप्रदाय को चुनौती देता है, तब अर्जुन अपनी शक्ति दिखाकर उसे पराजित करता है और सम्मानपूर्वक अपने परिवार को फिर से एक करता है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

तनाव से भरा दृश्य

इस दृश्य में तनाव बहुत गहरा है। नीली पोशाक वाला व्यक्ति शांत खड़ा है जबकि काली पोशाक वाला गुस्से में चिल्ला रहा है। घायल वृद्ध व्यक्ति की हालत देखकर दिल दुखी हो जाता है। पिता का बड़ा खेल नामक इस धारावाहिक में हर किरदार की अपनी कहानी है। मुझे यह संघर्ष बहुत पसंद आया और मैं आगे क्या होता है यह जानने के लिए उत्सुक हूं।

महिला का समर्थन

सफेद पोशाक वाली महिला की चिंता साफ झलक रही है। जब वह नीले पोशाक वाले की मदद करती है तो लगता है कि उनके बीच गहरा रिश्ता है। संघर्ष दृश्य अचानक शुरू हुआ लेकिन बहुत रोमांचक था। यह शो देखने में बहुत मज़ा आता है और इंटरनेट मंच पर इसे देखना सुखद अनुभव रहा है। पिता का बड़ा खेल बहुत अच्छा है।

खलनायक की अकड़

खलनायक की अकड़ देखकर गुस्सा आता है। उसे लगता है कि वह सब कुछ जीत जाएगा लेकिन अंत में उसे सबक मिलता है। नीले पोशाक वाले की आंखों में एक अलग ही चमक है। पिता का बड़ा खेल की कहानी बहुत दिलचस्प मोड़ ले रही है और दर्शकों को बांधे रखती है। यह नाटक रोमांच से भरा है।

पोशाक और सेट

पोशाक रचना बहुत शानदार है। फर वाले कॉलर और कमर की बेल्ट बहुत जच रही है। हर किरदार की पोशाक उनके स्वभाव को दर्शाती है। गुफा जैसा परिसर भी बहुत असली लग रहा था। मुझे यह दृश्य शैली बहुत पसंद आया और यह शो दृश्य रूप से भी बहुत समृद्ध है। पिता का बड़ा खेल की बनावट अच्छी है।

नायक की ताकत

जब नीले पोशाक वाले ने अपनी ताकत दिखाई तो मज़ा आ गया। वह बिना डरे सामने खड़ा हुआ। विरोधी की चालें बहुत गंदी थीं लेकिन नायक ने सब संभाल लिया। पिता का बड़ा खेल में ऐसे ही कड़ी की उम्मीद थी। यह संघर्ष बहुत दिलचस्प था और मुझे यह दृश्य बहुत भाया।

घायल की पीड़ा

घायल व्यक्ति के मुंह से खून देखकर झटका लगा। लगता है पहले ही बहुत बड़ी लड़ाई हो चुकी है। अब बारी है बदला लेने की। कहानी में यह मोड़ बहुत जरूरी था। दर्शक के रूप में मैं बंधा हुआ महसूस कर रहा हूं। पिता का बड़ा खेल की गहराई बढ़ती जा रही है। यह कहानी अनोखी है।

खामोश रिश्ता

महिला के हाथों में पट्टी बांधते वक्त जो खामोशी थी वह बहुत भारी थी। शब्दों की जरूरत नहीं थी। बस नजरें सब कह रही थीं। पिता का बड़ा खेल में ऐसे भावनात्मक पल बहुत अच्छे लगते हैं। यह नाटक दिल को छू लेता है और भावनाओं को जागृत करता है। मुझे यह पल बहुत यादगार लगा।

अभिनय की दाद

खलनायक के हावभाव बहुत नाटकीय हैं। वह बार बार इशारे कर रहा था जैसे कोई आदेश दे रहा हो। लेकिन नायक की चुप्पी सबसे बड़ा जवाब थी। यह टकराव बहुत देखने लायक था। मुझे यह किरदार निभाने वाले का अभिनय पसंद आया। पिता का बड़ा खेल में किरदार मजबूत हैं। यह शो बेहतरीन है।

विशेष प्रभाव

संघर्ष क्रम में विशेष प्रभावों का इस्तेमाल अच्छा है। जब ऊर्जा दिखाई दी तो पर्दा चमक उठी। यह लड़ाई दृश्य लंबा हो सकता था लेकिन छोटा और असरदार था। पिता का बड़ा खेल की निर्माण गुणवत्ता बढ़िया है। तकनीकी पक्ष भी मजबूत है और देखने में मज़ा आता है।

अगली कड़ी का इंतजार

पूरे दृश्य में एक अजीब सी खामोशी और शोर का मिश्रण था। हर कोई किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा था। अंत में जो धमाका हुआ वह जरूरी था। मैं अगली कड़ी का बेसब्री से इंतजार कर रहा हूं। यह शो बहुत लत लगाने वाला है और पिता का बड़ा खेल देखने लायक है। मुझे यह बहुत पसंद है।