रात के बाजार की रोशनी में यह मुलाकात बहुत गहरी लग रही है। तरबूज काटते हुए भी उसकी आंखों में एक अलग ही चमक है। वह साधारण विक्रेता नहीं लग रहा। पुनर्जन्म: मैं ही हूँ महाबली में ऐसे मोड़ देखकर मजा आ गया। काले कपड़े वाली महिला के चेहरे पर गुस्सा और चिंता दोनों साफ दिख रहे हैं। यह कहानी आगे क्या रूप लेगी, यह जानने के लिए मैं बेताब हूँ। इस मंच पर देखने का अनुभव भी काफी अच्छा रहा है।
वर्दी वाली लड़की अचानक आई और फिर चली गई। क्या वह इस आदमी की असली पहचान जानती है? उसकी मुस्कान के पीछे कोई राज छिपा हो सकता है। पुनर्जन्म: मैं ही हूँ महाबली की कहानी में हर किरदार महत्वपूर्ण लगता है। विक्रेता का व्यवहार बता रहा है कि वह कुछ छिपा रहा है। रात के बाजार का माहौल इस नाटक को और भी रोचक बना रहा है। मुझे यह कार्यक्रम बहुत पसंद आ रहा है और मैं अगली कड़ी देखना चाहती हूँ।
शुरुआत में कोट पैंट वाले लोग गए, फिर यह महिला आई। ऐसा लगता है कि यह आदमी कोई बड़ा अफसर या अपराधी है जो छिप रहा है। उसकी सोने की चेन भी इस बात का संकेत देती है। पुनर्जन्म: मैं ही हूँ महाबली में पात्रों के बीच का तनाव बहुत अच्छे से दिखाया गया है। महिला के कपड़े और उसका अंदाज बताता है कि वह अमीर है। फिर भी वह इस साधारण ठेले पर क्यों आई? यह सवाल मुझे परेशान कर रहा है।
तरबूज के टुकड़ों के बीच यह बातचीत बहुत भारी लग रही है। दोनों एक दूसरे को घूर रहे हैं बिना कुछ बोले। कभी-कभी खामोशी शोर से ज्यादा तेज होती है। पुनर्जन्म: मैं ही हूँ महाबली ने इस दृश्य में यही साबित किया है। पुरुष के चेहरे के भाव बदलते रहे, पहले शांति फिर हैरानी। यह अभिनय बहुत लाजवाब है। रात के बाजार की भीड़ में भी इनका अपना दुनिया अलग लग रही थी। मुझे यह नाटक बहुत पसंद आ रहा है।
अंत में उसकी आंखों में जो झटका दिखा, वह सब कुछ बदल सकता है। क्या महिला ने कोई ऐसा राज खोल दिया जो वह भूल गया था? पुनर्जन्म: मैं ही हूँ महाबली की कहानी में पुनर्जन्म का तत्व बहुत रोचक है। वह विक्रेता बनकर क्यों रह रहा है, यह जानना जरूरी है। महिला के काले खाल के कोट और चमकदार गहने उसकी हैसियत बता रहे हैं। इस मंच पर यह कार्यक्रम देखना मेरी आदत बन गई है। हर कड़ी में नया रहस्य मिलता है।
दृश्य की रोशनी और रंग बहुत खूबसूरत हैं। चमकदार साइन के नीचे यह कहानी और भी जादुई लग रही है। विक्रेता की सादगी और महिला की चमक-धमक का अंतर बहुत अच्छा है। पुनर्जन्म: मैं ही हूँ महाबली में दृश्य कथा कहने का तरीका बहुत मजबूत है। मुझे लगता है कि इन दोनों का पुराना नाता बहुत गहरा है। वह उसे पहचानती है लेकिन वह अनजान बनने की कोशिश कर रहा है। यह खेल देखने में बहुत मजा आ रहा है।
क्या वह वास्तव में तरबूज बेच रहा है या यह कोई छलावा है? उसके हाथों में चाकू पकड़ने का तरीका भी अलग लग रहा है। शायद वह खतरनाक इंसान है। पुनर्जन्म: मैं ही हूँ महाबली में हर छोटी चीज का मतलब निकालना पड़ता है। महिला के चेहरे पर सवाल थे और उसके जवाब उसके चेहरे पर थे। यह बिना संवाद की लड़ाई बहुत दमदार थी। मुझे यह शैली बहुत पसंद है और मैं आगे क्या होता है देखना चाहती हूँ।
भीड़ में भी ये दोनों अकेले लग रहे थे। बाकी लोग बस पृष्ठभूमि में थे। ध्यान सिर्फ इन दोनों के बीच के तनाव पर था। पुनर्जन्म: मैं ही हूँ महाबली ने छायांकन बहुत अच्छा किया है। विक्रेता ने जब सिर उठाया तो लगा जैसे कोई राज खुलने वाला है। महिला की आवाज में गुस्सा था लेकिन आंखों में दर्द भी था। यह भावनात्मक गहराई मुझे बहुत पसंद आई। इस मंच पर ऐसे कार्यक्रम मिलना दुर्लभ है।
उसकी सोने की चेन और घड़ी बताती है कि वह गरीब नहीं है। फिर भी वह काम के वस्त्र पहनकर काम कर रहा है। यह विरोधाभास कहानी का मुख्य हिस्सा है। पुनर्जन्म: मैं ही हूँ महाबली में ऐसी बारीकियां बहुत ध्यान देने वाले हैं। महिला शायद उसकी पुरानी दुश्मन या प्रेमिका हो सकती है। उनके बीच का लगाव बहुत मजबूत है। मुझे लगता है कि अगली कड़ी में बड़ा खुलासा होगा। मैं इंतजार नहीं कर सकती।
रात के बाजार का शोर और इनकी चुप्पी। यह अंतर बहुत ही फिल्मी लग रहा है। विक्रेता का रवैया शांत है लेकिन अंदर तूफान है। पुनर्जन्म: मैं ही हूँ महाबली की कहानी धीरे-धीरे खुल रही है। महिला के जाने के बाद वह फिर से तरबूज काटने लगता है। जैसे कुछ हुआ ही नहीं। लेकिन हम जानते हैं कि सब कुछ बदल गया है। यह अंत बहुत प्रभावशाली था। मुझे यह नाटक बहुत पसंद आ रहा है।