जब वह लड़की रोते हुए कमरे में आई और उसके मुंह पर टेप लगा था, तो दिल दहल गया। बूढ़े आदमी का चेहरा देखकर लगा जैसे वह अपनी बेटी को देख रहा हो। उसने जैसे ही टेप हटाया और लड़की चीखी, उसका दर्द साफ झलक रहा था। मेरे एक्स के गॉडफादर ने मुझे रौंदा में ऐसे सीन देखकर लगा कि यह सिर्फ एक्शन नहीं, इमोशनल ड्रामा भी है। पिता का गुस्सा और बेटी का डर बहुत असली लगा।
रंगीन फोन कवर देखकर पहले तो लगा कोई मजाक है, लेकिन जब बूढ़े आदमी ने उसे गौर से देखा, तो समझ आया कि यह कोई कोड या संदेश हो सकता है। युवक की हंसी और बूढ़े की गंभीरता के बीच का कंट्रास्ट बहुत अच्छा था। मेरे एक्स के गॉडफादर ने मुझे रौंदा में ऐसे डिटेल्स देखकर लगा कि हर चीज का कोई न कोई मतलब है। शायद यह फोन कवर ही कहानी की चाबी है।
लड़की का कैद से निकलना और फिर पिता के गले लगना बहुत इमोशनल था। उसकी आंखों में आंसू और चेहरे पर चोटें देखकर लगा जैसे वह लंबे समय से तकलीफ में थी। बूढ़े आदमी का उसे गले लगाना और फिर बंदूक निकालना दिखाता है कि वह अब लड़ने के लिए तैयार है। मेरे एक्स के गॉडफादर ने मुझे रौंदा में ऐसे सीन देखकर लगा कि यह कहानी सिर्फ बदले की नहीं, बल्कि प्यार की भी है।
युवक की हंसी और बूढ़े आदमी की चुप्पी के बीच का तनाव बहुत अच्छा था। लगता था जैसे युवक कुछ छिपा रहा है और बूढ़ा आदमी उसे समझने की कोशिश कर रहा है। मेरे एक्स के गॉडफादर ने मुझे रौंदा में ऐसे सीन देखकर लगा कि यह कहानी सिर्फ एक्शन नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक खेल भी है। हर डायलॉग और हर एक्सप्रेशन में कुछ न कुछ छिपा था।
जब बूढ़े आदमी ने बंदूक निकाली और लड़की को गले लगाया, तो लगा जैसे वह दोनों दुनियाओं के बीच फंसा हो। एक तरफ उसकी बेटी की सुरक्षा और दूसरी तरफ बदले की आग। मेरे एक्स के गॉडफादर ने मुझे रौंदा में ऐसे सीन देखकर लगा कि यह कहानी सिर्फ एक्शन नहीं, बल्कि इमोशनल ड्रामा भी है। बंदूक और प्यार का यह मेल बहुत असली लगा।