शुरुआत में ही सिंह परिवार की बैठक में इतना तनाव देखकर मैं हैरान रह गया। अरविंद सिंह का गुस्सा साफ़ दिख रहा था और विजय सिंह की आँखों में चिंता साफ़ झलक रही थी। फिर अचानक कहानी में मोड़ आया जब उस लड़के ने खाना बनाया। मोह का स्वामी, देवियाँ दीवानी नामक इस शो में भावनाओं का ऐसा खेल देखा जो दिल को छू गया। परिवार की जिम्मेदारियों और प्यार के बीच का संघर्ष बहुत गहराई से दिखाया गया है। हर दृश्य में एक नया रहस्य छिपा है जो दर्शकों को बांधे रखता है और वे अंत तक देखते हैं।
लाल बालों वाली उस लड़की की मासूमियत देखकर मन पिघल गया। जब वह सीढ़ियों से उतरकर आई तो उसकी आँखों में एक अलग ही चमक थी। खाने की मेज पर बैठकर उसने जो खुशी जताई वह बहुत प्यारी लगी। मोह का स्वामी, देवियाँ दीवानी की कहानी में ऐसे पल बहुत खास हैं। उस लड़के ने जब उसे अंगूठी दी तो लगा जैसे किसी ने दिल में उंगली रख दी हो। ऐसे रोमांटिक पल देखकर ही तो हम ड्रामा देखना पसंद करते हैं और खुश होते हैं।
जादुई संदेश वाला सीन देखकर मैं चौंक गया। जब स्क्रीन पर लिखा आया कि प्यार का स्तर बदल गया है, तो लगा कहानी में जादू है। जीवन और मृत्यु साथ निभाने से लेकर अमर प्रेम तक का सफर आसान नहीं होता। मोह का स्वामी, देवियाँ दीवानी में ऐसे काल्पनिक तत्वों का इस्तेमाल कहानी को रोचक बनाता है। लड़के की मेहनत और लड़की का प्यार दोनों ही दिल जीत लेते हैं। यह शो सिर्फ रोमांस नहीं बल्कि एक अलग दुनिया की सैर कराता है जो सबको पसंद आएगा।
सफेद बालों वाले लड़के की शांत मुस्कान ने सबका ध्यान खींचा। उसने बिना कुछ कहे अपने प्यार का इजहार कर दिया। रसोई में खाना बनाना और फिर उसे परोसना एक साधारण बात लग सकती है पर यहाँ यह बहुत खास था। मोह का स्वामी, देवियाँ दीवानी के इस एपिसोड में सादगी ही सबसे बड़ी ताकत बनी। जब उसने अंगूठी पहनाई तो लड़की की आँखों में आँसू देखकर मैं भी भावुक हो गया। सच्चा प्यार शब्दों में नहीं कर्मों में दिखता है और यही बात अच्छी लगी।
सिंह परिवार की उस बैठक में जो गंभीरता थी वह पूरे शो के मूड को सेट करती है। पत्थर की दीवारें और मोटी मेजें उस रौब को बढ़ाती हैं। फिर अचानक घर के गर्मजोशी भरे दृश्य आते हैं। मोह का स्वामी, देवियाँ दीवानी में इस अंतर का इस्तेमाल बहुत अच्छे से किया गया है। एक तरफ सत्ता का संघर्ष है तो दूसरी तरफ दिल का सुकून। दर्शक दोनों दुनिया का मजा ले सकते हैं। हर किरदार की अपनी एक अलग पहचान है जो कहानी को आगे बढ़ाती है।
लड़की के सींग और उसके कान उसे एक अलग ही पहचान देते हैं। वह इंसान नहीं लगती पर उसके जज्बात बिल्कुल इंसानों जैसे हैं। जब वह खाना खा रही थी तो उसकी खुशी देखने लायक थी। मोह का स्वामी, देवियाँ दीवानी में ऐसे काल्पनिक पात्रों को असली दुनिया में दिखाना एक बड़ी उपलब्धि है। उस लड़के ने उसे कभी अलग नहीं समझा बल्कि अपनापन दिया। यही तो असली रिश्ते की नींव होती है जो हर किसी को पसंद आती है और दिल को छूती है।
अंगूठी वाला सीन मेरा पसंदीदा पल रहा। जब उसने अपनी उंगली में वह अंगूठी पहनाई तो लगा जैसे वादा पक्का हो गया हो। लाल नाखून और सुनहरी अंगूठी का मेल बहुत सुंदर लगा। मोह का स्वामी, देवियाँ दीवानी की दृश्य कथा बहुत मजबूत है। छोटी छोटी चीजों से बड़ी बातें कही गई हैं। लड़के की आँखों में जो चमक थी वह सब कुछ बता रही थी। ऐसे पल बार बार देखने को मन करता है और वे यादगार बन जाते हैं।
खाने की मेज पर रखे व्यंजन देखकर भूख लगने लगी। इतने सारे पकवान और उस पर भी सुंदर तरीके से परोसे गए। लड़के ने मेहनत करके सब तैयार किया था। मोह का स्वामी, देवियाँ दीवानी में खाने के जरिए प्यार जताना एक अनोखा तरीका है। जब लड़की ने पहला निवाला खाया तो उसका चेहरा खिल उठा। यह दिखाता है कि प्यार पेट से होकर भी दिल तक जाता है। ऐसे सीन दर्शकों को बहुत पसंद आते हैं और वे जुड़ाव महसूस करते हैं।
शाम का सूरज ढल रहा था और खिड़की से जो रोशनी आ रही थी वह बहुत सुहावनी थी। उस रोशनी में दोनों का बैठना किसी पेंटिंग जैसा लग रहा था। मोह का स्वामी, देवियाँ दीवानी के छायांकन ने इस सीन को और भी खास बना दिया। रंगों का इस्तेमाल और छाया का खेल देखने लायक था। जब लड़की ने आँसू पोंछे तो लगा जैसे बादल छंट गए हों। ऐसे दृश्य दिल पर गहरा असर छोड़ते हैं और यादगार बन जाते हैं।
इस शो में हर मोड़ पर एक नया चमत्कार मिलता है। कभी गुस्सा तो कभी प्यार, कभी तनाव तो कभी सुकून। मोह का स्वामी, देवियाँ दीवानी की कहानी कभी बोर नहीं होने देती। लड़के और लड़की का मेलजोल बहुत स्वाभाविक लगता है। जादुई तत्व वाला हिस्सा कहानी में रोमांच डालता है। अंत में जब प्यार का स्तर बढ़ता है तो दर्शक भी खुश हो जाते हैं। यह शो हर उम्र के लोगों को पसंद आएगा और वे इसे बार बार देखेंगे।