इस दृश्य में रात के स्ट्रीट फूड का माहौल बहुत जीवंत है, लेकिन पुरुष के चेहरे पर एक अजीब सी उदासी है। वह बार-बार शराब पी रहा है, जैसे किसी गहरे दर्द को भुलाने की कोशिश कर रहा हो। महिला उसके सामने शांत है, लेकिन उसकी आँखों में भी कुछ कहने को है। वैद्य की मुक्ति जैसे ही आती है, लगता है कि यह सिर्फ खाने का समय नहीं, बल्कि दो टूटे दिलों का मिलन है। हर घूंट में एक कहानी छुपी है।