रेलवे ट्रैक के पास का यह सीन दिल को छू लेता है। पीली जैकेट वाला शख्स जब दवा की शीशी निकालता है, तो लगता है जैसे वैद्य की मुक्ति का पल आ गया हो। बूढ़ी औरतों की आंखों में दर्द और उम्मीद दोनों झलकते हैं। ट्रक के पीछे खड़े लोग जैसे एक परिवार लग रहे हैं, जो मुश्किल वक्त में एक-दूसरे का सहारा बन गए हैं। यह दृश्य बताता है कि जिंदगी की गाड़ी कभी-कभी रुकती है, पर इंसानियत का सफर जारी रहता है।