इस नाटक में चमड़े का कोट पहने व्यक्ति का पागलपन देखकर रोंगटे खड़े हो गए। नाचघर में मस्ती करने के बाद सीधे कब्र खोदना किसी दुश्मन को भी नहीं सुहाता। सिद्धगिरि जीवन-मृत्यु ऋण की कहानी बहुत गहरी है और हर मोड़ पर झटका देती है। काले لباس वाली महिला की आंखों में दर्द साफ दिख रहा था। ऐसा लगता है कि बदले की आग सब कुछ जला देगी। बहुत ही तनावपूर्ण सीन हैं जो दर्शकों को बांधे रखते हैं।
काले लेस वाली महिला की कहानी दिल को छू लेती है। शुरू में शांत दिखने वाली इस किरदार ने अंत में जो गुस्सा दिखाया वो कमाल का था। सिद्धगिरि जीवन-मृत्यु ऋण में दिखाया गया संघर्ष बहुत यथार्थ लगता है। नीले रोब वाले व्यक्ति की चुप्पी भी कई सवाल खड़े करती है। क्या वो मदद करेंगे या चुप रहेंगे? यह सस्पेंस बना हुआ है। देखने वालों को यह नाटक जरूर पसंद आएगा और हैरान कर देगा।
खलनायक का किरदार इतना नफरत भरा कैसे हो सकता है यह देखकर हैरानी हुई। मिट्टी में दफनाने वाला सीन बहुत ही डरावना था और रोंगटे खड़े कर देने वाला था। सिद्धगिरि जीवन-मृत्यु ऋण की पटकथा में हिम्मत है जो ऐसे कठिन विषयों को दिखाती है। सफेद पोशाक वाली लड़की की चीखें कानों में गूंज रही हैं। ऐसे दृश्य आसानी से भुलाए नहीं जा सकते। निर्देशक ने माहौल बहुत अच्छे से बनाया है।
पुराने जमाने की सेटिंग और कपड़ों का डिजाइन बहुत शानदार है और आंखों को सुकून देता है। सैनिकों की वर्दी से लेकर हवेली तक सब कुछ असली लगता है। सिद्धगिरि जीवन-मृत्यु ऋण में दृश्य कथा कहने का तरीका बहुत मजबूत है। लाल कार्पेट पर खड़े होकर बातचीत करने वाला सीन बहुत ही नाटकीय था। हर किरदार की अपनी एक अलग पहचान है। यह कार्यक्रम देखने में बहुत रंगीन और रोमांचक लगता है।
नाचघर का सीन और फिर रात का अंधेरा कुएं वाला सीन बहुत विरोधाभास है और दिमाग घुमा देता है। रोशनी से अंधेरे तक का सफर इस कहानी का सार है। सिद्धगिरि जीवन-मृत्यु ऋण में दिखाया गया धोखा बहुत दर्दनाक है। चमड़े वाले कोट वाले ने जो किया वो कायरता की हद है। महिला की मजबूरी देखकर गुस्सा आता है। ऐसी कहानियां समाज को झकझोरती हैं। बहुत ही प्रभावशाली प्रस्तुति है।
शुरूआत में ही इतना तनाव देखकर लगा कि आगे क्या होगा और कौन बचेगा। सभी किरदार एक दूसरे को घूर रहे थे जैसे कोई बड़ा खुलासा होने वाला हो। सिद्धगिरि जीवन-मृत्यु ऋण की शुरुआत ही इतनी तेज है। नीले वर्दी वाले सैनिकों की मौजूदगी माहौल को और गंभीर बनाती है। हर किसी के चेहरे पर एक रहस्य छिपा हुआ है। यह पहेली सुलझाने के लिए पूरा श्रृंखला देखना पड़ेगा।
महिला के चेहरे पर जो आंसू थे वो बिना बोले सब कह रहे थे और दिल तोड़ देते थे। उसकी आवाज में जो दर्द था वो सीधे दिल में उतर गया। सिद्धगिरि जीवन-मृत्यु ऋण में भावनाओं को बहुत बारीकी से दिखाया गया है। जब वो मिट्टी में दब रही थी तो लगा सांस रुक जाएगी। ऐसे भावनात्मक सीन कम ही देखने को मिलते हैं। अभिनय बहुत ही लाजवाब है और दिल को छू लेती है।
कहानी की रफ्तार बहुत तेज है और एक पल में ही सब बदल जाता है और हैरानी होती है। मस्ती से लेकर मौत तक का सफर बहुत छोटा है। सिद्धगिरि जीवन-मृत्यु ऋण में समय की कमी नहीं लगती। हर सीन के बाद नया मोड़ आता है। चमड़े वाले आदमी की हंसी बहुत डरावनी थी। ऐसा लगता है कि वो किसी पागलखाने से भागा हो। बहुत ही अनोखा और रोमांचक अनुभव है यह।
नीले रोब वाले व्यक्ति की शांति और चमड़े वाले कोट वाले का शोर एक दूसरे के विपरीत हैं और अच्छे लगते हैं। अच्छाई और बुराई की लड़ाई साफ दिख रही है। सिद्धगिरि जीवन-मृत्यु ऋण में किरदारों का चयन बहुत सही है। हवेली का आंगन गवाह बना है इन सब घटनाओं का। पुराने जमाने की कहानियों में ऐसा नाटक देखना सुकून देता है। यह कार्यक्रम जरूर देखना चाहिए।
अंत में जब महिला ने वापस आकर देखा तो उसकी आंखों में आग थी और बदला लेने का इरादा था। बदला लेने का वक्त आ गया है ऐसा लग रहा है। सिद्धगिरि जीवन-मृत्यु ऋण का अंत बहुत धमाकेदार होने वाला है। जो आज मारा गया वो कल लौट सकता है। यह कहानी जीवन और मृत्यु के खेल को दिखाती है। बहुत ही गहरी और विचार करने वाली कहानी है सभी के लिए।