जब योद्धा ने अपना कवच उतारा तो लगा जैसे उसने अपनी ताकत त्याग दी हो। लेकिन असली ताकत तो उसके आंसुओं में थी जब वह घुटनों पर गिर गया। हमेशा गलत से प्यार किया की कहानी में यह दृश्य सबसे दिल दहला देने वाला है। रानी का गुस्सा और उसका दर्द दोनों ही आंखों में साफ दिख रहे थे।
मशाल से पीठ पर जलने का वह दृश्य देखकर रोंगटे खड़े हो गए। सुनहरा खून बहना कोई जादू नहीं, बल्कि श्राप लग रहा था। हमेशा गलत से प्यार किया में दिखाया गया यह दंड बहुत क्रूर था। योद्धा की चीखें और रानी का पत्थर दिल चेहरा, सब कुछ एक भयानक सपने जैसा लग रहा था।
तलवारों से बना सिंहासन और उस पर बैठी रानी का रुतबा देखकर डर लग रहा था। योद्धा का कांपते हाथों से कटोरी पकड़ना और फिर उसे गिरा देना, यह सब उसकी कमजोरी दिखा रहा था। हमेशा गलत से प्यार किया में सत्ता और प्रेम का यह संघर्ष बहुत गहरा है।
योद्धा ने जब वह चमकता हुआ फूल बनाया तो लगा शायद सब ठीक हो जाएगा। लेकिन रानी ने उसे काला कर दिया। यह दृश्य बताता है कि अब उनके बीच कोई उम्मीद नहीं बची। हमेशा गलत से प्यार किया की यह कहानी बहुत दुखद मोड़ ले रही है।
जब योद्धा जमीन पर गिरा और उसके घाव से सुनहरा तरल बहा, तो लगा जैसे कोई देवता मर रहा हो। लेकिन रानी की आंखों में नफरत थी, दया नहीं। हमेशा गलत से प्यार किया में दिखाया गया यह रिश्ता कितना जहरीला हो चुका है, यह देखकर अफसोस होता है।