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चाँद का कशिश, ज़ालिम की धड़कनवां8एपिसोड

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चाँद का कशिश, ज़ालिम की धड़कन

पुरातात्विक संरक्षिका चंद्रिका एक उपन्यास में फँसकर रोशनी राजकुमारी की जगह ले लेती है। कहानी के अनुसार तीन दिन बाद ज़ालिम शासक रुद्रप्रताप उसे मार डालेगा। जान बचाने के लिए वह उससे उलझती है, हर जाल को चतुराई से नाकाम करती है। धीरे-धीरे दोनों के बीच कशिश बढ़ती है। चंद्रिका रुद्रप्रताप के बचपन के घावों को भरती है और उसके अकेले दिल को गर्माहट देती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

उसकी आँखों में दर्द और उसकी मुट्ठी में गुस्सा

जब वह हरे रंग के पत्थर को सीने से लगाकर रोती है, तो लगता है जैसे उसकी दुनिया टूट गई हो। फिर वह आता है—काले वस्त्रों में लिपटा, ताज पहने, आँखों में आग लिए। उसने उसका हाथ पकड़ा, गला दबाया, पर फिर भी उसकी आवाज़ में कंपन था। चाँद का कशिश, ज़ालिम की धड़कन में यह दृश्य दिल को छू लेता है। वह चीखती है, वह रुकता है—दोनों के बीच एक अदृश्य धागा बंधा है जो टूट नहीं रहा। मोमबत्तियों की रोशनी में उनकी साँसें एक-दूसरे से टकराती हैं। क्या यह नफरत है या प्यार? शायद दोनों।