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चाँद का कशिश, ज़ालिम की धड़कनवां28एपिसोड

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चाँद का कशिश, ज़ालिम की धड़कन

पुरातात्विक संरक्षिका चंद्रिका एक उपन्यास में फँसकर रोशनी राजकुमारी की जगह ले लेती है। कहानी के अनुसार तीन दिन बाद ज़ालिम शासक रुद्रप्रताप उसे मार डालेगा। जान बचाने के लिए वह उससे उलझती है, हर जाल को चतुराई से नाकाम करती है। धीरे-धीरे दोनों के बीच कशिश बढ़ती है। चंद्रिका रुद्रप्रताप के बचपन के घावों को भरती है और उसके अकेले दिल को गर्माहट देती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

गले से पकड़कर दिल तक पहुँच गए

शुरुआत में तो लगा कि यह आदमी सच में पागल हो गया है, इतनी बेरहमी से गला दबा रहा था कि साँस रुक जाएगी। लेकिन जैसे-जैसे चाँद का कशिश, ज़ालिम की धड़कन आगे बढ़ा, पता चला कि यह सब एक गहरे दर्द और मोहब्बत का खेल है। नीली रोशनी में वो दोनों जब ज़मीन पर गिरते हैं, तो लगता है जैसे दुनिया थम गई हो। उस औरत की आँखों में डर नहीं, बल्कि एक अजीब सी चमक थी—जैसे वो जानती हो कि यह आदमी उसे कभी मार नहीं सकता। बच्चे का रोना, पिंजरे का दृश्य—सब कुछ इतना भावनात्मक था कि दिल भर आया। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे ड्रामे देखकर लगता है कि प्यार और नफरत की लकीरें कितनी पतली होती हैं।