जब वह हरे रंग के पत्थर को सीने से लगाकर रोती है, तो लगता है जैसे उसकी दुनिया टूट गई हो। फिर वह आता है—काले वस्त्रों में लिपटा, ताज पहने, आँखों में आग लिए। उसने उसका हाथ पकड़ा, गला दबाया, पर फिर भी उसकी आवाज़ में कंपन था। चाँद का कशिश, ज़ालिम की धड़कन में यह दृश्य दिल को छू लेता है। वह चीखती है, वह रुकता है—दोनों के बीच एक अदृश्य धागा बंधा है जो टूट नहीं रहा। मोमबत्तियों की रोशनी में उनकी साँसें एक-दूसरे से टकराती हैं। क्या यह नफरत है या प्यार? शायद दोनों।