सफेद पोशाक वाला पात्र जब खजाने के कमरे में घुसता है, तो उसकी आँखों में चमक देखकर लगता है कि वह अजेय रंगीला की तरह बेकाबू हो गया है। सोने के सिक्कों को हाथ में लेकर वह जो खुशी मनाता है, वह वास्तव में दिल को छू लेती है। लेकिन जैसे ही वह अधिकारियों के कमरे में जाता है, माहौल बदल जाता है। सम्राज्ञी बेबस की तरह वह भी अब फंस चुका है। अधिकारियों की हंसी और उसकी घबराहट के बीच का तनाव बहुत अच्छे से दिखाया गया है। अंत में जब वह भागता है, तो लगता है कि कहानी अभी खत्म नहीं हुई है।