अजेय रंगीला में जब सम्राज्ञी बेबस ने उस युवक को देखा, तो उनकी आँखों में सिर्फ़ गुस्सा नहीं, बल्कि एक गहरा दर्द था। वह घुटनों पर गिरा, चीखा, रोया — पर वह खड़ी रही, जैसे पत्थर की मूर्ति। उसकी चुप्पी सबसे ज़्यादा डरावनी थी। क्या वह माफ़ करेगी? या बदला लेगी? हर फ्रेम में तनाव इतना था कि सांस रुक जाए। नेटशॉर्ट पर ऐसे ड्रामे देखकर लगता है जैसे खुद उस कमरे में खड़े हों।