जब वह लाल फर कोट पहनकर आई, तो कमरे का माहौल बदल गया। सफेद ड्रेस वाली लड़की की आंखों में ईर्ष्या और डर दोनों थे। यह झुग्गी का छुपा अरबपति जैसा मोड़ था जहां अमीरी और गरीबी का टकराव साफ दिख रहा था। हर कोई चुपचाप देख रहा था, जैसे कोई बड़ा धमाका होने वाला हो।
उस बूढ़े आदमी की मुस्कान में कुछ छिपा था। वह सब कुछ जानता था, फिर भी चुप रहा। झुग्गी का छुपा अरबपति में भी ऐसा ही एक पात्र था जो सब कुछ देखता था लेकिन बोलता नहीं था। उसकी आंखें सब कुछ बता रही थीं, जैसे वह अगले पल का इंतजार कर रहा हो।
वह लड़का हरे स्वेटर में खड़ा था, उसके चेहरे पर एक छोटा सा निशान था। वह कुछ बोलना चाहता था, लेकिन डर रहा था। झुग्गी का छुपा अरबपति में भी ऐसा ही एक पात्र था जो सच्चाई जानता था लेकिन डर के मारे चुप रहा। उसकी आंखों में दर्द था।
क्रिसमस की रोशनी में सब कुछ सुंदर लग रहा था, लेकिन अंदर कुछ गड़बड़ थी। झुग्गी का छुपा अरबपति में भी ऐसा ही था - बाहर से सब ठीक, अंदर से टूटा हुआ। लाल कोट वाली महिला की आंखों में एक रहस्य था जो सब कुछ बदल सकता था।
उसकी आंखों में डर था, जैसे वह कुछ खोने वाली हो। वह लाल कोट वाली महिला से डर रही थी। झुग्गी का छुपा अरबपति में भी ऐसा ही एक पात्र था जो अपने प्यार को खोने से डरता था। उसकी उंगलियां कांप रही थीं, जैसे वह कुछ पकड़ना चाहती हो।