बुज़ुर्गों पर अत्याचार की शुरुआत ही इतनी तनावपूर्ण है कि सांस रुक जाए। सफेद सूट पहने युवक का आत्मविश्वास और बुजुर्ग की गंभीर मुद्रा देखकर लगता है कि कोई बड़ा षड्यंत्र चल रहा है। कमरे की सजावट और लोगों के कपड़े सब कुछ बहुत अमीराना है, पर चेहरों पर डर साफ दिख रहा है। यह दृश्य किसी बड़े परिवार के विभाजन की कहानी लगता है जहां हर कोई अपनी चाल चल रहा है।
बुज़ुर्गों पर अत्याचार में काले सूट वाली महिला का किरदार सबसे दिलचस्प लग रहा है। वह कुछ बोल नहीं रही पर उसकी आंखें सब कुछ कह रही हैं। जब वह मुस्कुराती है तो लगता है कि उसे कुछ पता है जो बाकियों को नहीं। उसकी चुप्पी और बाकियों की हड़बड़ी के बीच का अंतर बहुत गहरा है। शायद वह इस खेल की सबसे बड़ी खिलाड़ी हो जो सबको धोखा दे रही है।
बुज़ुर्गों पर अत्याचार में उस बुजुर्ग की कुर्सी सिर्फ बैठने की जगह नहीं, बल्कि सत्ता का प्रतीक लगती है। वह छड़ी पकड़े बैठे हैं और सब उनकी ओर देख रहे हैं। उनकी आंखों में थकान है पर आवाज में अभी भी दबदबा है। जब वह बोलते हैं तो पूरा कमरा शांत हो जाता है। यह दृश्य दिखाता है कि उम्र के साथ ताकत कम हो सकती है, पर अधिकार कभी नहीं जाता।
बुज़ुर्गों पर अत्याचार में उस आदमी का ब्रोच जो घड़ी जैसा दिखता है, बहुत अजीब है। वह बार-बार अपनी टाई ठीक करता है और घबराया हुआ लगता है। शायद वह ब्रोच कोई संकेत है या फिर कोई छुपा हुआ राज। उसकी हड़बड़ी और बाकियों की शांति के बीच का अंतर बहुत स्पष्ट है। लगता है कि वह कुछ छुपा रहा है जो सबके लिए खतरनाक हो सकता है।
बुज़ुर्गों पर अत्याचार में हरे ब्रोच वाला शख्स अचानक आता है और सबकी नजरें उस पर टिक जाती हैं। उसका आना किसी तूफान की तरह है जो सब कुछ बदल देगा। उसकी आंखों में एक अजीब सी चमक है जो डरावनी लगती है। शायद वह इस परिवार का कोई पुराना दुश्मन है या फिर कोई नया खिलाड़ी जो सबको हरा देगा। उसका आना कहानी में नया मोड़ लाएगा।