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बुज़ुर्गों पर अत्याचारवां51एपिसोड

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बुज़ुर्गों पर अत्याचार

अपने गृहनगर में दादा के अंतिम संस्कार के दौरान एपेक्स ग्रुप की अध्यक्ष बेला पर दो पुरुष आरोप लगाते हैं कि उसके द्वारा वित्तपोषित प्रतिष्ठित वृद्धाश्रम ने उनके पिता की मृत्यु का कारण बना। सच जानने के लिए बेला परिचारिका बनकर भेष बदलती है और एक चौंकाने वाला अंधकारमय रहस्य उजागर करती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

पोशाक और आभूषणों का खेल

इस दृश्य में हर किसी के कपड़े और गहने उनकी हैसियत बता रहे हैं। बुज़ुर्गों पर अत्याचार जैसे गंभीर मुद्दों पर बात हो रही है, लेकिन सबकी नज़रें एक-दूसरे के वेश पर टिकी हैं। वो हरा कीलक पहने व्यक्ति सबसे ज्यादा डरावना लग रहा है, जैसे कोई राज़ छिपा रहा हो।

क्रोध का वातावरण

कमरे में तनाव इतना है कि सांस लेना मुश्किल हो रहा है। बुज़ुर्गों पर अत्याचार की चर्चा के बीच सबके चेहरे पर अलग-अलग रंग हैं। कोई गुस्से में है, तो कोई डरा हुआ। ये नाटक नेटशॉर्ट मंच पर देखने में बहुत रोचक लगता है, हर दृश्य में कुछ नया है।

आंखों की भाषा

संवाद से ज्यादा असर इन किरदारों की आंखों से हो रहा है। बुज़ुर्गों पर अत्याचार जैसे विषय पर सबकी प्रतिक्रिया अलग-अलग है। वो महिला जो काली पोशाक में है, उसकी आंखों में एक अजीब सी चमक है, जैसे वो सब कुछ जानती हो लेकिन चुप रहे।

शक्ति संतुलन

इस कमरे में कौन असली मालिक है, ये साफ नहीं है। बुज़ुर्गों पर अत्याचार की बातें हो रही हैं, लेकिन हर कोई अपनी शक्ति दिखा रहा है। वो व्यक्ति जो बीच में खड़ा है, उसकी शारीरिक भाषा से लगता है कि वो सबको नियंत्रण करना चाहता है।

रहस्यमय वातावरण

ये दृश्य किसी रोमांचक फिल्म से कम नहीं है। बुज़ुर्गों पर अत्याचार जैसे गंभीर मुद्दे पर बात हो रही है, लेकिन सब कुछ इतना रहस्यमयी है। हर किरदार के पीछे कोई न कोई राज़ छिपा है, और ये नाटक नेटशॉर्ट मंच पर देखने में बहुत मज़ेदार लगता है।

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