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मछली बनी ड्रैगनवां65एपिसोड

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मछली बनी ड्रैगन

आलसी कर्मचारी यश दूसरी दुनिया में बिना स्तर की बेकार सुनहरी मछली बनकर आया। उसने भक्षण विकास प्रणाली अपने साथ जोड़ ली। अपनी सुनहरी मछली वाली किस्मत के दम पर उसने एक-एक करके सबको पीछे छोड़ दिया और ड्रैगन बन गया। उसने खून के दम पर होने वाले भेदभाव को कुचल दिया, सैकड़ों राक्षसों की दावत में राज किया, और झील के अंदर रहने वाले राक्षसों की किस्मत बदल दी।
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इस एपिसोड की समीक्षा

दक्षिण द्वार की भव्यता

इस कार्यक्रम की शुरुआत ही कमाल की है। बादलों के ऊपर बना विशाल द्वार देखकर रोंगटे खड़े हो गए। नीली त्वचा वाला रक्षक बहुत डरावना लग रहा था। उसकी आँखों में चमक और हाथ में छाता अजीब संयोजन है। मुझे लगा कि यह कहानी आगे जाकर बहुत रोचक मोड़ लेगी। मछली बनी ड्रैगन नामक इस कार्यक्रम में ऐसे दृश्य बार बार देखने को मिलते हैं जो मन को बांधे रखते हैं।

कुल्हाड़ी योद्धा का गुस्सा

लाल आँखों वाला योद्धा जब कुल्हाड़ी लेकर आया तो माहौल गर्म हो गया। उसकी ताकत को देखकर लग रहा था कि अब युद्ध टलने वाला नहीं है। उसने पूरे द्वार को तोड़ने की कोशिश की। धूल और पत्थर उड़ते हुए दिखाई दिए। युद्ध दृश्य बहुत तेज हैं। मछली बनी ड्रैगन में ऐसे अंक देखकर रोमांच बढ़ जाता है। बस यही उम्मीद है कि अंत अच्छा हो।

रानी देवी का आगमन

जब स्वर्ग की रानी देवी प्रकट हुईं तो सब शांत हो गया। उनका सुंदर रूप और सोने के आभूषण मन मोह लेते हैं। उन्होंने बिना हथियार के ही सामने वाले को रोकने की कोशिश की। उनकी आँखों में एक अलग ही तेज था। यह पात्र कहानी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा लग रहा है। मछली बनी ड्रैगन में महिला शक्ति को ऐसे दिखाना बहुत पसंद आया।

सफेद बालों वाला देवता

अंत में जो सफेद बालों वाला पात्र आया वह सबसे अलग था। उसके शरीर से सुनहरी रोशनी निकल रही थी। उसकी मुस्कान में एक रहस्य छिपा हुआ था। लगता है वह किसी बड़ी शक्ति का मालिक है। उसके प्रवेश ने पूरी कहानी बदल दी। मछली बनी ड्रैगन के इस मोड़ ने सबको हैरान कर दिया। अब देखना है कि वह किस पक्ष को चुनेगा।

बादलों का साम्राज्य

पूरा सेटअप बादलों के बीच बना है जो बहुत ही सपनों जैसा लगता है। सफेद बादल और सुनहरा प्रकाश देखकर लगता है कि हम स्वर्ग में हैं। वास्तुशिल्प नक्काशी बहुत प्राचीन और भव्य है। दृश्य कोण ने इस जगह की विशालता को अच्छे से दिखाया। मछली बनी ड्रैगन की दृश्य गुणवत्ता वास्तव में बहुत ऊंची है। देखने वाला बस देखता ही रह जाता है।

टकराव की घड़ी

जब दो शक्तियां आमने सामने आईं तो हवा में बिजली कड़कने लगी। एक तरफ गुस्सा था तो दूसरी तरफ शांत तेज। यह टकराव सिर्फ शारीरिक नहीं बल्कि विचारों का भी लग रहा था। हर पल तनाव बना हुआ था। दर्शक भी सांस रोके देख रहे थे। मछली बनी ड्रैगन में ऐसे संघर्ष दिखाकर निर्माताओं ने कमाल कर दिया। यह पल भुलाया नहीं जाएगा।

आँखों की चमक

सभी पात्रों की आँखों में एक अलग ही चमक थी। किसी की आँखें पीली थीं तो किसी की सुनहरी। यह चमक उनकी अंदरूनी शक्ति को दिखा रही थी। खासकर सफेद बालों वाले की आँखें देखकर डर और सम्मान दोनों हुआ। शृंगार और विशेष प्रभाव का कमाल है। मछली बनी ड्रैगन में ऐसे बारीकियों पर ध्यान देना सराहनीय है। छोटी चीजें बड़ा असर डालती हैं।

हथियारों की ताकत

कुल्हाड़ी और छाता जैसे हथियारों का उपयोग बहुत अनोखा है। आम तौर पर तलवारें दिखाई जाती हैं लेकिन यहाँ कुछ नया था। कुल्हाड़ी से आग निकल रही थी जो खतरनाक लग रही थी। रक्षक का छाता भी कोई साधारण वस्तु नहीं लग रहा था। मछली बनी ड्रैगन में हथियारों को भी किरदार की तरह दिखाया गया है। यह सोच बहुत रचनात्मक है।

कहानी का रहस्य

अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ कि असली खलनायक कौन है। क्या वह योद्धा है या कोई और साजिश चल रही है। रानी देवी की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। सफेद बालों वाले की प्रवेश ने सवाल और बढ़ा दिए हैं। यह अनिश्चितता देखने में मज़ा देती है। मछली बनी ड्रैगन की कहानी में यह पहेली सुलझाना जरूरी है। अगला अंक कब आएगा।

कुल मिलाकर अनुभव

पूरा दृश्य देखकर मन संतुष्ट हुआ। युद्ध और नाटक सब कुछ संतुलित था। न तो बहुत तेज था न ही बहुत धीमा। संगीत भी पृष्ठभूमि में अच्छा लग रहा था। ऐसे शो देखकर लगता है कि समय सफल हुआ। मछली बनी ड्रैगन जैसे शो हिंदी दर्शकों के लिए नया अनुभव हैं। सबको इसे जरूर देखना चाहिए। बहुत शानदार प्रस्तुति है।