इस दृश्य में क्वीनपो वाली बहन की शांति देखकर रोंगटे खड़े हो गए। जब सब डरे हुए थे, तब भी उनके चेहरे पर कोई डर नहीं था। रणभूमि की रानी में ऐसा किरदार देखना दुर्लभ है। उन्होंने छाते से दुश्मनों को हराया और फिर चॉपस्टिक्स से वार किया। असली ताकत शोर में नहीं, खामोशी में होती है। यह दृश्य दिलचस्प था।
काले कपड़ों वाले व्यक्ति का मुकाबला देखकर लगा कि वह बहुत खतरनाक है। लेकिन सैनिक साहब ने भी अपना लोहा मनवाया। बीच में जब क्वीनपो वाली बहन ने हस्तक्षेप किया, तो सब हैरान रह गए। रणभूमि की रानी के इस कड़ी में मुकाबले के दृश्य बहुत तेज़ हैं। हर हरकत में जान है। दर्शक बंधे रहते हैं।
लाल लालटेन और सजावट के बीच यह लड़ाई बहुत अजीब लग रही थी। दुल्हन के चेहरे पर डर साफ़ दिख रहा था। बूढ़ी दादी तो बस देखती रह गईं। रणभूमि की रानी की कहानी में यह मोड़ बहुत बड़ा है। लगता है यह शादी किसी योजना का हिस्सा थी। हर कोई चौंक रहा है। माहौल बहुत तनावपूर्ण है।
किसी ने सोचा भी नहीं था कि खाने की चॉपस्टिक्स हथियार बन सकती हैं। क्वीनपो वाली बहन ने जब यह किया, तो सैनिक साहब भी सहम गए। यह पल सबसे बेहतरीन था। रणभूमि की रानी में ऐसे रचनात्मक विचार देखने को मिलते हैं। साधारण चीज़ों का इस्तेमाल करके बड़ा वार करना ही असली हुनर है। बहुत शानदार दृश्य।
नीली वर्दी वाले सैनिक साहब के चेहरे पर निशान थे और गुस्सा साफ़ दिख रहा था। उन्होंने तलवार निकाली लेकिन फिर रुक गए। जब चॉपस्टिक्स उनकी तरफ आई, तो उनकी आँखें फटी रह गईं। रणभूमि की रानी में किरदारों के बीच की रसायन बहुत अच्छी है। हर कोई अपनी भूमिका में सच्चा है। डर और गुस्सा दोनों दिखे।
काले कपड़ों वाले व्यक्ति के मुंह से खून निकल रहा था, फिर भी वह लड़ने को तैयार था। यह जिद देखकर लगा कि बदला बहुत ज़रूरी है। लेकिन क्वीनपो वाली बहन ने सब संभाल लिया। रणभूमि की रानी में भावनाओं का खेल बहुत गहरा है। चोट लगने के बाद भी लड़ना आसान नहीं होता। यह दृश्य दिल को छू गया।
पहले लगा कि यह साधारण छाता है, लेकिन फिर इसमें से नुकीली चीज़ें निकलीं। क्वीनपो वाली बहन के पास हर चीज़ का इंतज़ाम है। रणभूमि की रानी में ऐसे हथियार देखकर मज़ा आ गया। यह दिखाता है कि वह कितनी तैयार हैं। दुश्मन को कभी मौका नहीं मिलना चाहिए। यह डिज़ाइन बहुत अनोखा है।
पीछे खड़े मेहमानों के चेहरे देखने लायक थे। कोई चिल्लाया, कोई बस देखता रहा। दुल्हन ने मुंह पर हाथ रख लिया था। रणभूमि की रानी के इस दृश्य में भीड़ की प्रतिक्रिया बहुत असली लगा। जब सामने कुछ बड़ा हो रहा हो, तो लोग ऐसे ही डरते हैं। यह माहौल बहुत अच्छा बनाया गया है। सब हैरान हैं।
लाल कार्पेट पर खून के निशान और टूटी हुई चीज़ें। सब कुछ बिखरा हुआ था। सैनिक साहब और क्वीनपो वाली बहन के बीच की दूरी कम होती गई। रणभूमि की रानी में तनाव बनाए रखना आसान नहीं है, लेकिन यहाँ बहुत अच्छा है। हर पल लगता है कि अब कुछ भी हो सकता है। यह अनिश्चितता दर्शकों को बांधे रखती है।
जब चॉपस्टिक्स सैनिक साहब के चेहरे के पास रुकी, तो सबकी साँसें रुक गईं। क्वीनपो वाली बहन की आँखों में ठंडक थी। रणभूमि की रानी का यह चरमोत्कर्ष बहुत दमदार है। उन्होंने बिना बोले सब कुछ कह दिया। ताकत का असली प्रदर्शन यही है। यह अंत देखकर अगली कड़ी देखने का मन करता है। बहुत शानदार।