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रणभूमि की रानी

अराजक गणराज्य काल में चन्द्रावती संघ की प्रमुख बबिता राठौड़ विश्वासघात का शिकार होकर भी साहस से उभरती है। राघव मेहता और सोनल चौहान की साज़िशों का सामना करते हुए वह अपने पिता वीरेंद्र सिंह राठौड़ से मिलती है। विक्रम राठौड़ और शत्रु शक्तियों के षड्यंत्रों का पर्दाफाश कर, वह राजेश्वरी देवी के साथ मिलकर चन्द्रावती संघ को पुनर्जीवित करती है और अंततः सेनापति बनकर राष्ट्र की रक्षा करती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

छाता हथियार बना

इस शो में कार्रवाई के सीन बहुत ही अनोखे और हैरान करने वाले हैं। नायिका ने अपने खास छाते से दुश्मनों को बड़ी आसानी से हराया जो बहुत ही अद्भुत था। रमादेवी की उपस्थिति से कहानी में एकदम नया मोड़ आया है। रणभूमि की रानी में ऐसे दृश्य देखकर बहुत रोमांच होता है। हर पल रहस्य बना रहता है और देखने वाले को बांधे रखता है। बहुत पसंद आया।

नदी किनारे का रहस्य

रात के समय नदी के किनारे का दृश्य बहुत ही रहस्यमयी और डरावना था। रमादेवी जो विक्रम राठौड़ की माता हैं, उनका संवाद बहुत भारी लग रहा था। नायिका ने बंदूक तानकर जो खड़ा किया वो देखकर रोंगटे खड़े हो गए। रणभूमि की रानी की कहानी बहुत गहरी होती जा रही है। आगे क्या होगा यह जानने की उत्सुकता बढ़ रही है। सब देखें।

माँ और बेटे का खेल

विक्रम राठौड़ की माता का किरदार बहुत शक्तिशाली और प्रभावशाली लग रहा है। उनके चेहरे के भाव बता रहे हैं कि वे कुछ बहुत बड़ा छिपा रही हैं। नायिका का गुस्सा साफ़ दिख रहा था और वह झुकने वाली नहीं थी। रणभूमि की रानी में परिवार के रिश्तों की जंग भी चल रही है। यह नाटक बहुत पसंद आ रहा है और बार बार देखने को मन करता है।

बदले की आग

नायिका की आँखों में बदले की आग साफ़ दिख रही थी और वह डर रही थी। उसने बिना डरे हमलावरों का सामना किया और सबको हैरान कर दिया। रमादेवी से उसकी बहस बहुत तेज थी और माहौल गर्म हो गया था। रणभूमि की रानी में हर किरदार अपने मकसद के लिए लड़ रहा है। ऐसे शो देखने का मज़ा ही अलग है और नींद उड़ जाती है। रात भर देखें।

पुराना ज़माना और नई कहानी

कपड़े और सेटिंग बहुत ही पुराने ज़माने की लग रही है और असली लगती है। फिर भी कहानी में नयापन है जो पुराने ज़माने में भी चलता है। रमादेवी का लाल कोट बहुत जच रहा था और शानदार लग रहा था। नायिका का सूट भी बहुत सूट कर रहा था और फिट था। रणभूमि की रानी में दृश्यों पर बहुत ध्यान दिया गया है। देखने में बहुत अच्छा लग रहा है और आँखों को सुकून देता है।

तनाव से भरा माहौल

जब नायिका ने बंदूक तानी तो पूरा माहौल तनावपूर्ण और डरावना हो गया। रमादेवी भी घबराई हुई लग रही थीं और उनका चेहरा पीला पड़ गया था। विक्रम राठौड़ का नाम सुनकर सब चौंक गए और हैरान रह गए। रणभूमि की रानी में हर एपिसोड के बाद रहस्य बढ़ता जाता है। मैं अगला एपिसोड देखने के लिए बेताब हूँ और इंतज़ार नहीं कर पा रहा हूँ। जल्दी आए।

महिला शक्ति का प्रतीक

इस शो में महिला किरदार बहुत मजबूत और ताकतवर दिखाए गए हैं। नायिका ने खुद अपनी रक्षा की और किसी पर निर्भर नहीं रही। रमादेवी भी किसी से कम नहीं लग रही थीं और उनका रुतबा बना हुआ था। रणभूमि की रानी में औरतों की ताकत को दिखाया गया है। यह देखकर बहुत अच्छा लगा कि वे डरती नहीं हैं और लड़ती हैं। सबको पसंद आएगा।

संवादों की ताकत

रमादेवी और नायिका के बीच के संवाद बहुत भारी और गहरे थे। हर शब्द में वजन था और असर था। लग रहा था कि कोई बड़ा राज खुलने वाला है और सच सामने आएगा। रणभूमि की रानी में संवाद बहुत अच्छे लिखे गए हैं। एक्टिंग भी बहुत स्वाभाविक लग रही थी सबकी और दिल को छू लेती है। बहुत ही बेहतरीन काम है सबका।

रात का अंधेरा और सच

रात के अंधेरे में सच सामने आ रहा है और सब खुल रहा है। नदी का किनारा गवाह बना हुआ है और चुपचाप देख रहा है। नायिका का गुस्सा जायज़ लग रहा था और वह सही थी। रमादेवी के चेहरे पर डर साफ़ दिख रहा था और वे कांप रही थीं। रणभूमि की रानी में माहौल बनाने में निर्देशक ने कमाल किया है। बहुत ही शानदार प्रोडक्शन है और देखने लायक है।

अंत क्या होगा

यह देखकर हैरानी हुई कि नायिका ने गोली क्यों नहीं चलाई और रुक गई। रमादेवी क्या राज़ खोलेंगी यह जानना ज़रूरी है और बहुत आवश्यक है। विक्रम राठौड़ की कहानी अभी अधूरी है और चल रही है। रणभूमि की रानी का अगला पार्ट कब आएगा इसका इंतज़ार है। नेटशॉर्ट पर ऐसे शो मिलना दुर्लभ है और खास है। सबको देखना चाहिए।