अमीरी और गरीबी के बीच की इस कहानी में जज्बात सबसे बड़ा हथियार है। दोनों किरदारों के बीच की दूरी सिर्फ पैसों की नहीं लग रही। शायद ये खून का रिश्ता हो। दृश्य देखने के बाद मन में कई सवाल उठ खड़े हुए हैं। अंत क्या होगा ये जानने की बेचैनी बढ़ रही है। कहानी की गहराई दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है।
फोन प्राप्त करते ही बूढ़े व्यक्ति के चेहरे के भाव बदल गए। शायद उम्मीद की कोई किरण दिखी हो या फिर कोई बुरी खबर। नौजवान का फोन करना भी संयोग नहीं लग रहा। ब्रेकअप से बिलियनयर तक में रिश्तों की जटिलताओं को खूब दिखाया गया है। वक्त के साथ सब कुछ बदल रहा है पर रिश्ते वही हैं। जज्बाती जुड़ाव बहुत मजबूत है।
बारिश का ध्वनि प्रभाव और वो सन्नाटा, रोंगटे खड़े कर देता है। बूढ़े व्यक्ति की सांसें और फोन की स्क्रीन की रोशनी, छायांकन बहुत बेहतरीन है। ऐसा लगता है कि कोई बड़ा राज खुलने वाला है। हर दृश्य में एक कहानी छिपी हुई है। आवाजों का इस्तेमाल कहानी को आगे बढ़ा रहा है। माहौल बनाने में निर्देशक को सफलता मिली है।
कहानी की शुरुआत ही इतनी रहस्यमयी है कि आगे क्या होगा अनुमान लगाना मुश्किल है। एक तरफ मौत से जंग और दूसरी तरफ ताकत का खेल। ब्रेकअप से बिलियनयर तक में हर कड़ी के बाद रहस्य बढ़ता जाता है। दर्शक को बांधे रखने की कला इसमें है। रोमांचक मोड़ का इस्तेमाल बहुत अच्छे से किया गया है। हर मोड़ पर नया पेंच मिल रहा है।
बारिश की रात और वो टूटी झोपड़ी, बूढ़े व्यक्ति के चेहरे पर दर्द साफ दिख रहा था। फोन की घंटी ने सन्नाटा तोड़ दिया, शायद ये कॉल उसकी किस्मत बदल दे। ब्रेकअप से बिलियनयर तक की कहानी में ऐसा मोड़ उम्मीद नहीं था। खून से सने कपड़े और वो कांपते हाथ, दिल दहला देने वाले हैं। माहौल इतना भारी है कि सांस रुक सी जाती है। हर विवरण पर ध्यान दिया गया है जो कहानी को गहरा बनाता है।
वातानुकूलित ऑफिस में खड़ा वो नौजवान और बाहर गिरती बारिश, कितना विरोधाभास है। उसकी आंखों में ठंडक है पर शायद दिल में तूफान। फोन उठाने का तरीका बता रहा है कि वो कितना शक्तिशाली है। इस शो का हर सीन एक पहेली की तरह खुलता है। लिबास की सफाई और कमरे की सजावट उसकी हैसियत बता रही है। लग्जरी और संघर्ष का ये मिलन बहुत प्रभावशाली है।
दोनों जगह बारिश हो रही है पर हालात जमीन आसमान का फर्क। एक तरफ संघर्ष और दूसरी तरफ शानोशौकत। ब्रेकअप से बिलियनयर तक में दिखाया गया ये विरोधाभास बहुत गहरा है। क्या ये दोनों एक दूसरे से जुड़े हैं? ये सवाल दिमाग में घूम रहा है। गरीबी और अमीरी का ये चित्रण बहुत वास्तविक लगता है। सामाजिक अंतर को बहुत बारीकी से दिखाया गया है।
बूढ़े व्यक्ति के हाथ में वो मोबाइल किसी चमत्कार से कम नहीं लग रहा। गंदे माहौल में वो डिवाइस अजीब लग रहा था। शायद यही फोन उसके बेटे से उसे जोड़ता हो। कार्टून शैली भी काफी अंधेरा और गंभीर है, माहौल बनाए रखता है। स्क्रीन की रोशनी ने चेहरे पर नई उम्मीद जगा दी है। तकनीक और इंसानियत का ये टकराव देखने लायक है।
नौजवान के पेशावर लिबास वाली शख्सियत देखकर लगता है वो किसी बड़ी कंपनी का मालिक है। पर उसकी आंखों में एक उदासी है। शायद उसे उस बूढ़े व्यक्ति की खबर मिल गई हो। ब्रेकअप से बिलियनयर तक में भावनाएं बहुत गहरी हैं। खिड़की के पास खड़ा होकर वो क्या सोच रहा होगा, ये जानना जरूरी है। ताकत के पीछे छिपा दर्द साफ झलक रहा है।
खिड़की से बाहर देखते हुए वो क्या सोच रहा होगा? शायद पछतावा या फिर गुस्सा। फोन रखने के बाद उसकी मुट्ठी भिंच गई, ये छोटा सा विवरण बहुत कुछ कह गया। दृश्य की रोशनी और परछाई का खेल बहुत ही शानदार तरीके से किया गया है। हर हरकत में एक छिपा हुआ मतलब नजर आ रहा है। शारीरिक भाषा से कहानी बयां हो रही है।