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Breakup Se Billionaire Tak

Hero ek orphan hai, jise ek cold business tycoon ne bachaya. Ehsaan ka badla chukane ke liye, woh uske haath mein ek tez chhuri ban jaata hai. Elite school se lekar corporate wars tak, hero strict training mein rapidly grow karta hai. Lekin ek purane case ko chhedne ki wajah se woh trouble mein pad jaata hai. Phir ek planned "betrayal" dono ke beech break-up karwa deti hai...
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इस एपिसोड की समीक्षा

दमदार कड़ी का अंत

कुल मिलाकर यह कड़ी बहुत दमदार थी। सेब वाला दृश्य तो अमर बन गया है। ब्रेकअप से बिलियनेयर तक ने साबित कर दिया है कि कम संवाद में भी बहुत कुछ कहा जा सकता है। किरदारों की पोशाक से ही उनका व्यक्तित्व समझ आ जाता है। काला सूट और ग्रे कोट दोनों अलग मिजाज दिखा रहे थे। मरीज की धारीदार शर्ट उसे कमजोर दिखा रही थी। यह दृश्य कथा बहुत पसंद आई। मैं अगली कड़ी का इंतजार नहीं कर पा रही हूं। यह मेरी पसंदीदा कहानी बन गया है। सब देखें।

निर्देशक की चालाकी

अंत में जब वो चला गया तो काले सूट वाले ने मरीज की तरफ देखा। उस नजर में क्या था, प्यार या गुस्सा? ब्रेकअप से बिलियनेयर तक के निर्देशक ने यह उलझन जानबूझकर बनाया है। मुझे यह पहेली सुलझानी है। अस्पताल की दीवारें भी गवाह बन रही हैं इन राजों की। दृश्य का रंग संयोजन भी बहुत भावनात्मक है। हर दृश्य में एक ठंडक है जो रोंगटे खड़े कर देती है। मैं इस कहानी का हिस्सा बनना चाहती हूं। बस यही चाहती हूं कि यह जल्दी आगे बढ़े। मैं उत्साहित हूं।

दरवाजे की आहट

दरवाजे की आहट से ही रहस्य शुरू हो गया। काले सूट वाले का हाथ रुका नहीं, बस नजरें उठीं। ब्रेकअप से बिलियनेयर तक में यह आत्मविश्वास देखने लायक है। चश्मे वाले ने टोकरी रखी और सीधे बात शुरू की। लगता है वो मालिकाना हक जता रहा था। मरीज बिचारा बीच में फंस गया है। इन तीनों के बीच की लगन बहुत जबरदस्त है। मैं यह जानना चाहती हूं कि आखिर हुआ क्या था। कहानी की रफ्तार बहुत सही है। न बहुत तेज न बहुत धीमी। बिल्कुल सही संतुलन है। बहुत अच्छा लगा।

सेब का छिलका और राज

सेब का छिलका एक लंबी लड़ी में निकल रहा था, जैसे इनका रिश्ता उलझा हुआ है। ब्रेकअप से बिलियनेयर तक में प्रतीकवाद का इस्तेमाल कमाल का है। काले सूट वाले की नीली आंखें सीधे दिल में उतर जाती हैं। उसने कुछ कहा नहीं पर सब कुछ कह दिया। कोट वाले के प्रवेश ने माहौल बदल दिया। अब यह देखना है कि मरीज किसका साथ देगा। यह कहानी रोज नया मोड़ ले रही है। मुझे यह अनपेक्षित मोड़ बहुत पसंद हैं। नेटशॉर्ट पर ऐसी सामग्री मिलना सुखद है। मैं संतुष्ट हूं।

सेब छीलने का गहरा सीन

सेब छीलने का वो दृश्य बहुत गहरा था। काले सूट वाले की आंखों में गुस्सा साफ दिख रहा था। ब्रेकअप से बिलियनेयर तक में ऐसे मोड़ आते हैं जो दिल को छू लेते हैं। अस्पताल का माहौल और वो खामोशी सब कुछ कह रही थी। मुझे लगा जैसे कोई बड़ा राज छिपा है इन तीनों के बीच। चित्रण शैली भी बहुत खूबसूरत है। हर झलक में एक कहानी है। मैं अगली कड़ी देखने के लिए बेताब हूं। क्या वो चश्मे वाला वापस आएगा? यह सवाल दिमाग में घूम रहा है। बहुत ही शानदार प्रस्तुति है। मुझे यह बहुत पसंद आया।

तनाव भरी एंट्री

जब वो कोट वाला अंदर आया तो हवा में तनाव बढ़ गया। उसने फलों की टोकरी रखी पर नजरें काले सूट वाले पर थीं। ब्रेकअप से बिलियनेयर तक की कहानी में यह टकराव बहुत दिलचस्प है। मरीज बिस्तर पर चुपचाप सब देख रहा था। उसकी आंखों में सवाल थे पर जुबान पर खामोशी। ऐसे नाटक ही असली मजा देते हैं। नेटशॉर्ट मंच पर देखने का अनुभव भी अच्छा रहा। दृश्य गुणवत्ता और ध्वनि प्रभाव सब कुछ सही था। कहानी आगे क्या मोड़ लेगी यह जानना जरूरी है। मैं इंतजार कर रही हूं।

रिश्तों की उलझन

काले सूट वाले ने सेब काटा पर ध्यान किसी और पर था। यह जो त्रिकोण है ना, इसमें कुछ तो गड़बड़ है। ब्रेकअप से बिलियनेयर तक में रिश्तों की यह उलझन बहुत अच्छे से दिखाई गई है। अस्पताल के कमरे की रोशनी और छाया का खेल भी कमाल का था। मुझे वो पल पसंद आया जब चश्मे वाले ने कंधे पर हाथ रखा। यह दोस्ती थी या धमकी? कुछ भी हो, यह दृश्य यादगार बन गया। मैं हर रोज नई कड़ी देखती हूं। ऐसी कहानियां ही दिल जीत लेती हैं। सबको दिखाना चाहिए।

खामोशी का शोर

मरीज की हालत देखकर लग रहा था कि वो सब जानता है। फिर भी वो चुप रहा। ब्रेकअप से बिलियनेयर तक के किरदार बहुत गहरे हैं। हर किसी के चेहरे पर एक अलग भाव था। काले सूट वाले का गुस्सा और कोट वाले की मुस्कान दोनों खतरनाक लग रहे थे। यह कहानी सिर्फ प्यार की नहीं, बदले की भी लग रही है। मुझे यह अनिश्चितता बहुत पसंद आ रही है। दृश्य का संपादन भी बहुत सरल था। बिना किसी संवाद के इतना कुछ कह देना आसान नहीं है। यह कलाकारों की ताकत है। बहुत प्रभावशाली है।

सफेद चादरें और लाल सेब

चश्मे वाले के जाने के बाद जो खामोशी छा गई, वो सबसे भारी थी। काले सूट वाले ने सेब का टुकड़ा रखा पर खिलाया नहीं। ब्रेकअप से बिलियनेयर तक में ऐसे छोटे संकेत बहुत मायने रखते हैं। लगता है इन तीनों का बीतकाल बहुत गहरा है। अस्पताल की सफेद चादरें और वो लाल सेब का विरोधाभास बहुत अच्छा लगा। मुझे यह कहानी शुरू से पसंद आ रही है। कथा में एक अलग ही जादू है। मैं अपने दोस्तों को भी यह दिखा रही हूं। सबको यह पसंद आ रहा है। मैं खुश हूं।

चित्रण की बारीकियां

चित्रण की बारीकियां देखने लायक हैं। हाथ की उंगलियों की हिलजुल से ही भाव समझ आ रहे थे। ब्रेकअप से बिलियनेयर तक की निर्माण गुणवत्ता बहुत उच्च है। जब वो दरवाजे पर खड़ा हुआ तो लगा कोई खलनायक प्रवेश ले रहा हो। पर उसकी मुस्कान में कुछ और ही बात थी। मरीज की मासूमियत और उन दोनों की चालाकी साफ झलक रही थी। यह कहानी मुझे बांधे रखती है। मैं हर दृश्य को गौर से देखती हूं। कहीं कोई संकेत छूट न जाए। यह रहस्य बहुत मजेदार है। देखने में मजा आता है।

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