गुरु का लुक देखकर हैरानी हुई। सादे कपड़ों से चमकीले कोट तक का सफर अद्भुत है। आदित्य सिंह की मासूमियत देखकर दिल पिघल गया। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ में ऐसा हास्य अंदाज पहले नहीं देखा। जेड की अंगूठियां और शीतल पेय का दृश्य बहुत यादगार है। गुरु की सफेद दाढ़ी बहुत जंचती है।
आदित्य सिंह के गुरु का व्यवहार बहुत रहस्यमयी लगा। कभी गंभीर तो कभी मजाकिया अंदाज। दो महिलाओं का आना और दही की बोतलें पकड़ाना दृश्य को हल्का बना देता है। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ की कहानी में यह मोड़ अप्रत्याशित था। कुदाल लेकर जाने वाला दृश्य बहुत भावुक है। आदित्य की आंखों में आंसू थे।
क्लिप की शुरुआत में पहाड़ का नज़ारा बहुत सुंदर था। फिर अचानक कमरे का दृश्य आया। गुरु की दाढ़ी और भौंहें सफेद हैं जो उन्हें वजनदार बनाती हैं। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ में नाटक और हास्य का मिश्रण अच्छा है। आदित्य की आंखों में आंसू देखकर दुख हुआ। कमरे का सजावट भी बहुत पुराना है।
गुरु ने आदित्य को रूमाल दिया जो शायद कोई संकेत था। यह समझना मुश्किल है कि वे क्या चाहते हैं। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ के इस भाग में रहस्य बना हुआ है। आलीशान कोट पहनकर गुरु का अलग ही अंदाज है। आदित्य अब क्या करेगा यह देखना बाकी है। रूमाल पर कुछ लिखा था शायद।
दो महिलाएं लाल और काले कपड़ों में बहुत खूबसूरत लग रही थीं। गुरु के साथ उनका व्यवहार दोस्ताना था। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ में यह दिखाता है कि गुरु की जीवनशैली बदल गई है। आदित्य अभी भी पुराने कपड़ों में है जो विरोधाभास पैदा करता है। दही की बोतलें पीना मज़ेदार था।
आदित्य सिंह जब कुदाल उठाकर चलता है तो लगता है वह कुछ नया शुरू करने जा रहा है। जंगल में बांस के पेड़ और रास्ता बहुत शांत है। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ का दृश्य संयोजन प्राकृतिक है। गुरु का हंसना और आदित्य का रोना एक साथ देखना अजीब लगा। कुदाल बहुत पुरानी लग रही थी।
गुरु की आवाज़ और संवाद प्रस्तुति बहुत दमदार है। वे आदित्य को डांटते भी हैं और हंसाते भी हैं। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ में किरदारों के बीच का रिश्ता जटिल है। चमकीले कोट पुराने जमाने के माहौल में अजीब लगा पर मज़ा आया। आदित्य की आवाज़ में दर्द था। गुरु की हंसी बहुत खौफनाक थी।
आदित्य सिंह के चेहरे के भाव बहुत साफ़ दिख रहे हैं। वह गुरु को समझने की कोशिश कर रहा है। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ की कहानी में यह उलझन मुख्य है। बांस के जंगल में कुछ लोग महंगे कपड़े में दिखे जो आगे की कहानी का संकेत हो सकता है। आदित्य छुपकर देख रहा था। उसका डर साफ़ दिख रहा था।
क्लिप में शीतल पेय और दही की बोतलों का इस्तेमाल सामग्री के रूप में अच्छा है। गुरु की उंगलियों में कई अंगूठियां हैं जो उनकी अमीरी दिखाती हैं। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ में यह विवरण बहुत बारीकी से दिखाया गया है। आदित्य की सादगी इसके विपरीत है। घड़ी भी महंगी थी।
अंत में आदित्य का पुल पर चलना और फिर जंगल में जाना एक नई यात्रा की शुरुआत है। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ का यह दृश्य बहुत प्रेरणादायक है। गुरु ने उसे भेज दिया है या वह खुद जा रहा है यह स्पष्ट नहीं है। कुल मिलाकर क्लिप देखने में बहुत रोचक लगा। आगे क्या होगा देखना है।