शादी के बीच में बंदूक तानना कोई मज़ाक नहीं था। काली शर्ट वाले शख्स की आँखों में गुस्सा साफ़ दिख रहा था। सुनहरी पोशाक वाली लड़की के होंठों से खून बह रहा था फिर भी वो डटी रही। सीईओ का इच्छा का अनोखा खेल देखकर रोंगटे खड़े हो गए। ऐसे ड्रामे कम ही देखने को मिलते हैं जहाँ हर पल सस्पेंस बना रहे। नेटशॉर्ट पर देखने का मज़ा ही अलग है।
उसे गोद में उठाकर ले जाना वाला सीन बहुत रोमांटिक और डरावना दोनों था। लड़की बेहोश नहीं थी बस टूट चुकी थी। हॉलवे में उनकी बहस ने सब कुछ बदल दिया। सीईओ का इच्छा का अनोखा खेल की कहानी में ये मोड़ बहुत जरूरी था। काश वो उसे वहाँ छोड़ नहीं आते। दिल को बहुत ठेस लगी इस सीन को देखकर।
बारिश में अकेले चलना और फिर फोन की घंटी बजना। ऑगस्ट का नाम देखकर हैरानी हुई। क्या वो दोस्त है या दुश्मन? सुनहरी पोशाक वाली लड़की की हालत देखकर दिल दुखी हो गया। सीईओ का इच्छा का अनोखा खेल में इतना दर्द क्यों है? बस एक पल की चूक और सब बदल गया। मौसम भी गवाह बना रहा।
दूल्हे का जमीन पर गिरना और दुल्हन का चौंक जाना। शादी की रस्में बीच में ही रुक गईं। काली शर्ट वाले शख्स ने सबको चौंका दिया। सीईओ का इच्छा का अनोखा खेल का ये एपिसोड सबसे तेज़ रफ़्तार वाला था। अब आगे क्या होगा ये जानने की बेचैनी बढ़ रही है। सबकी साँसें रुक गई थीं।
बाथरूम में आईने के सामने रोना बहुत दर्दनाक था। उसने कुछ फेंका भी शायद गुस्से में। मेकअप खराब हो गया था पर आँखों का दर्द साफ़ था। सीईओ का इच्छा का अनोखा खेल में भावनाओं को बहुत गहराई से दिखाया गया है। हर बूंद आँसू कहानी कह रही थी। अकेलेपन का असली चेहरा था ये।
कार का आना और जबरदस्ती गाड़ी में डालना। दूल्हे का असली चेहरा अब सामने आ गया। सुनहरी पोशाक वाली लड़की चीख भी नहीं पाई। सीईओ का इच्छा का अनोखा खेल में खलनायक कौन है अब समझ नहीं आ रहा। क्या ऑगस्ट भी इसमें शामिल है? सब कुछ धुंधला होता जा रहा है।
गीली सड़क पर गिरा हुआ फोन और उसमें आ रही कॉल। सब कुछ अधूरा रह गया। काली शर्ट वाले शख्स को शायद खबर भी नहीं होगी। सीईओ का इच्छा का अनोखा खेल का क्लिफहेंजर बहुत तेज़ था। अगला एपिसोड कब आएगा बस यही सोच रही हूँ। नेटशॉर्ट ऐप पर वेट करना मुश्किल हो रहा है।
दुल्हन की सफेद पोशाक और पीछे खड़ी होकर सब देखना। वो कुछ कर भी नहीं सकती थी। सुनहरी पोशाक वाली लड़की की किस्मत में शायद संघर्ष लिखा था। सीईओ का इच्छा का अनोखा खेल में हर किरदार की अपनी मजबूरी है। सबकी आँखों में सवाल थे। कोई भी खुश नहीं लग रहा था उस पल।
हॉलवे की लाइटिंग और दोनों के बीच की दूरी। वो पास थे फिर भी दूर लग रहे थे। काली शर्ट वाले शख्स ने उसे छोड़ दिया शायद मजबूरी में। सीईओ का इच्छा का अनोखा खेल की सिनेमेटोग्राफी बहुत खूबसूरत है। हर फ्रेम एक तस्वीर जैसा लग रहा था। खामोशी शोर मचा रही थी।
आखिर में मुँह दबाकर ले जाना बहुत खौफनाक था। बारिश की आवाज़ में चीख दब गई। सुनहरी पोशाक वाली लड़की अब किसके भरोसे रहेगी। सीईओ का इच्छा का अनोखा खेल ने नींद उड़ा दी है। ऐसी थ्रिलर कहानी बार बार देखने को मिलती नहीं है। रात भर जागना तय है।