शुरुआत ही खून से होती है और फिर अस्पताल में तनाव चरम पर है। सूट वाले व्यक्ति के हाथ से खून बह रहा था और फिर मरीज ने बंदूक निकाल ली। सीईओ का इच्छा का अनोखा खेल में ऐसा मोड़ किसी ने नहीं सोचा था। पुलिस की एंट्री और चाकू की वारदात ने दिल की धड़कनें बढ़ा दीं। हर किरदार का डर साफ दिख रहा है। रहस्य बना हुआ है और अंत क्या होगा यह जानने की उत्सुकता बढ़ती जाती है। यह दृश्य बहुत ही तीव्र है और दर्शकों को बांधे रखता है।
ऑपरेटिंग रूम में इतना हंगामा मैंने पहले नहीं देखा। बेड पर लेटा मरीज असल में खेल का मास्टरमाइंड लग रहा है। उसने सबको हैरान कर दिया। सीईओ का इच्छा का अनोखा खेल की कहानी बहुत पेचीदा है। सफेद पोशाक वाली लड़की की चीखें रोंगटे खड़े करती हैं। आखिर में चाकू की नोक पर सब कुछ तय हो रहा है। कोई नहीं जानता कि अगले पल क्या होगा। यह अनिश्चितता ही इसकी खूबी है और यही कारण है कि लोग इसे देखना पसंद करते हैं।
सूट वाले आदमी ने स्केलपेल उठाया तो लगा अब खून खराबा होगा। लेकिन गोली चलते ही सबकी हालत खराब हो गई। सीईओ का इच्छा का अनोखा खेल में कार्रवाई के साथ भावना भी है। हल्के रंग की शर्ट वाले ने दुल्हन को बंधक बना लिया। यह विश्वासघात बहुत भारी पड़ा। देखने वाला बस देखता रह जाता है। इतना बड़ा धोखा कोई नहीं उम्मीद कर सकता था। रिश्तों की यह टूटन दिल को झकझोर देती है और सोचने पर मजबूर करती है।
पुलिस की वर्दी देखकर लगा सुकून मिलेगा पर हुआ उल्टा। बंदूक की नोक पर सब खड़े हैं। सीईओ का इच्छा का अनोखा खेल का अंत बहुत तेज है। हाथ में गोली लगने का दृश्य बहुत असली लगा। दर्द की चीखें कानों में गूंजती हैं। निर्देशक ने तनाव अच्छा बनाया है। दर्शक भी अपने आप को उस कमरे में महसूस करते हैं। माहौल बहुत भारी है और सांस रुक सी जाती है ऐसे दृश्य देखकर।
गुस्से में चिल्लाता हुआ सूट वाला व्यक्ति बहुत डरावना लग रहा था। उसके हाथ से खून टपक रहा था। सीईओ का इच्छा का अनोखा खेल में हर पल नया झटका देता है। मरीज की आंखों में अलग ही चमक थी। उसने सबको काबू में कर लिया। अंत में जो हुआ वह किसी ने नहीं सोचा था। कहानी में गहराई है और किरदारों की मजबूरी साफ दिखती है। हर कोई अपनी बारी का इंतजार कर रहा था बारी बारी से।
सफेद गाउन वाली लड़की बेचारी बहुत डर गई थी। उसके गले पर चाकू रख दिया गया। सीईओ का इच्छा का अनोखा खेल में औरतों की प्रतिक्रिया बहुत नेचुरल हैं। हल्की शर्ट वाले लड़के का रूपांतरण चौंकाने वाला है। वह दोस्त बना दुश्मन। ऑपरेटिंग लाइट्स के नीचे यह नाटक बहुत गहरा है। रोशनी में सब कुछ साफ दिख रहा था पर सच्चाई छिपी थी। अंधेरा दिलों में था जो बाहर आ गया।
अस्पताल का माहौल वैसे ही शांत होता है पर यहाँ शोर है। चीखें और गोलियों की आवाजें गूंज रही हैं। सीईओ का इच्छा का अनोखा खेल की कहानी बहुत मजबूत है। मरीज ने बंदूक तानी और सब स्तब्ध रह गए। कोई हिल नहीं सकता था। पुलिस भी बेबस लग रही थी उस पल। हर किसी की जान खतरे में थी और कोई रास्ता नहीं दिख रहा था। मौत सामने खड़ी थी और सब लाचार थे।
खून के छींटे और टूटा हुआ स्केलपेल देखकर घबराहट हुई। सूट वाले का दर्द साफ झलक रहा था। सीईओ का इच्छा का अनोखा खेल में हिंसा का चित्रण बहुत सटीक है। बंधक बनने वाली लड़की की आंखों में आंसू थे। कोई उसकी मदद को आगे नहीं आया। सब अपनी जान बचा रहे थे। यह स्वार्थ इंसानियत को शर्मसार करता है। बहुत ही कड़वा सच दिखाया है जो समाज की असलियत है।
यह रोमांचक कहानी मुझे बहुत पसंद आया क्योंकि इसमें रुकने का नाम नहीं लेता। एक के बाद एक वारदातें होती गईं। सीईओ का इच्छा का अनोखा खेल में रहस्य बनाए रखना कला है। मरीज का किरदार सबसे रहस्यमयी है। उसका चेहरा भावशून्य था पर इरादे खतरनाक थे। अंत अभी बाकी है। दर्शक बस यही चाहते हैं कि कहानी आगे बढ़े और सच सामने आए।
इस ऐप पर यह सीरीज देखने का अनुभव बहुत रोमांचक रहा। हर कड़ी में नया ट्विस्ट है। सीईओ का इच्छा का अनोखा खेल की लोकप्रियता का कारण यही है। ऑपरेटिंग रूम का सेट बहुत असली लगा। कलाकारों ने जान डाल दी है। मैं अगला पार्ट देखने के लिए बेताब हूं। कलाकारी बहुत बेहतरीन है और कहानी में दम है। यह समय बर्बाद नहीं करने देती है।