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असली वारिस: खाली हाथ पर हौसले बुलंदवां16एपिसोड

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असली वारिस: खाली हाथ पर हौसले बुलंद

स्नातक के दिन पुनर्जन्म लेकर, इस घर की असली बेटी अपनी कपटी बहन के दिए नकली कंगन को देखकर बस मुस्कुरा दी। पिछले जन्म में, इसी धोखे के कारण उसके अपने ही माता-पिता और सगे भाई ने उससे घृणा की थी, और भाई ने उसे अमानवीय यातनाएं देकर तबाह कर दिया था। लेकिन अब पासा पलट चुका है! इस नए जन्म में, वह अपना हक मांगने नहीं, बल्कि उस निर्दयी परिवार को पूरी तरह से बर्बाद करने आई है। क्या एक ठुकराई हुई बेटी अपने ही खून से इस खौफनाक प्रतिशोध को पूरा कर पाएगी?
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इस एपिसोड की समीक्षा

ग्रे पोशाक वाली बेटी का रहस्य

ग्रे पोशाक वाली बेटी की आंखों में एक अलग ही चमक है जब वो सामने वाली से बात कर रही है। लगता है कोई बड़ा राज खुलने वाला है जल्द ही। असली वारिस: खाली हाथ पर हौसले बुलंद में ऐसे दृश्य देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं दर्शकों के। काले कपड़े वाली मालकिन का घूरना भी काफी डरावना था उस वक्त।

परिवार का छुपा हुआ खेल

मोबाइल पर खबर देखकर हैरानी हुई कि परिवार में इतना बड़ा खेल चल रहा है छुपकर। असली वारिस: खाली हाथ पर हौसले बुलंद की कहानी में हर मोड़ पर नया बदलाव है। अमीर बाप और बेटे की बातचीत से साफ लग रहा था कि कुछ छुपाया जा रहा है सबसे।

कार्यालय का महंगा माहौल

चाय परोसने वाली बेटी की सादगी और कार्यालय के महंगे माहौल का अंतर बहुत गहरा है। असली वारिस: खाली हाथ पर हौसले बुलंद में किरदारों की गहराई बहुत अच्छी है। भूरा कोट वाले शख्स का व्यवहार थोड़ा अहंकारी लग रहा था उस वक्त सामने।

मखमली पोशाक और गुस्सा

काले मखमली पहनावा वाली मालकिन के कानों वाले झुमके बहुत खूबसूरत थे पर चेहरे का गुस्सा सब कुछ खराब कर रहा था। असली वारिस: खाली हाथ पर हौसले बुलंद में सजावट और नाटक का अच्छा मेल है। ग्रे पोशाक वाली बहन शांत दिख रही थी पर अंदर से तूफान थी।

पिता और बेटे की खामोशी

कार्यालय वाले दृश्य में पिता और बेटे के बीच की खामोशी बहुत कुछ कह रही थी चुपचाप। असली वारिस: खाली हाथ पर हौसले बुलंद की कहानी में संवाद से ज्यादा कार्य बोलते हैं। चश्मे वाले बाप की चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचा रही थी उस वक्त।

मोबाइल छवि पर सच

जब मोबाइल की छवि पर खबर आई तो सबके चेहरे के भाव बदल गए तुरंत। असली वारिस: खाली हाथ पर हौसले बुलंद में रहस्य बनाए रखने का तरीका कमाल का है। ग्रे पोशाक वाली बेटी को अब सच का पता चल गया है और बदलाव साफ दिख रहा है।

बहनों के बीच की ठन

दो बहनों के बीच की इस ठन गई है तो मामला गर्म होने वाला है जल्द। असली वारिस: खाली हाथ पर हौसले बुलंद में रिश्तों की खटास बहुत असली लगती है। काले कपड़े वाली मालकिन को लगता है वो सब काबू कर सकती है पर गलतफहमी है।

बेटे के आगमन का असर

भूरा कोट वाले बेटे के आगमन ने माहौल को थोड़ा हल्का किया पर बात गंभीर थी। असली वारिस: खाली हाथ पर हौसले बुलंद में हर किरदार का अपना वजन है। चाय लाने वाली बेटी की आंखों में भय साफ झलक रहा था उस पल।

शानदार फिल्मांकन कला

इस नाटक का फिल्मांकन और रोशनी बहुत शानदार गुणवत्ता की लगती है। असली वारिस: खाली हाथ पर हौसले बुलंद को देखने का अनुभव सिनेमाघर जैसा है। ग्रे पोशाक वाली बहन की मुस्कान के पीछे का दर्द अब समझ आ रहा है धीरे धीरे।

पहचान का बड़ा सवाल

कहानी में परिवार की असली पहचान का सवाल सबसे बड़ा है अभी। असली वारिस: खाली हाथ पर हौसले बुलंद में भावनात्मक नाटक बहुत तेजी से बढ़ता है। काले कपड़े वाली मालकिन को अब अपनी गलती का अहसास होने लगा है शायद।