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असली वारिस: खाली हाथ पर हौसले बुलंदवां29एपिसोड

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असली वारिस: खाली हाथ पर हौसले बुलंद

स्नातक के दिन पुनर्जन्म लेकर, इस घर की असली बेटी अपनी कपटी बहन के दिए नकली कंगन को देखकर बस मुस्कुरा दी। पिछले जन्म में, इसी धोखे के कारण उसके अपने ही माता-पिता और सगे भाई ने उससे घृणा की थी, और भाई ने उसे अमानवीय यातनाएं देकर तबाह कर दिया था। लेकिन अब पासा पलट चुका है! इस नए जन्म में, वह अपना हक मांगने नहीं, बल्कि उस निर्दयी परिवार को पूरी तरह से बर्बाद करने आई है। क्या एक ठुकराई हुई बेटी अपने ही खून से इस खौफनाक प्रतिशोध को पूरा कर पाएगी?
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इस एपिसोड की समीक्षा

लॉबी में तनाव का माहौल

कारोबारी सभागार में तनाव चरम पर है। ग्रे कोट वाली पात्र के हाथ में वह फाइल सब कुछ बदल सकती है। सुरक्षाकर्मी चुप खड़े हैं लेकिन माहौल गर्म है। असली वारिस: खाली हाथ पर हौसले बुलंद में यह सीन दिलचस्प है। ब्राउन सूट वाला व्यक्ति चिंतित लग रहा है। क्या वह सच छुपा रहा है? कैमरे की चमक माहौल को और नाटकीय बना रही हैं। हर किसी की नजरें उस लिफाफे पर टिकी हैं। यह कहानी आगे क्या मोड़ लेगी, यह देखना रोमांचक होगा।

अचानक हुआ बड़ा धक्का

अचानक बेरेट वाली लड़की ने हरे शर्ट वाले व्यक्ति को धक्का दे दिया। वह जमीन पर गिर गया और सब हैरान रह गए। काली ड्रेस वाली पात्र चिल्लाई और घबरा गई। यह मोड़ किसी ने नहीं सोचा था। इस धारावाहिक को देखना मजेदार है। असली वारिस: खाली हाथ पर हौसले बुलंद की कहानी में यह बदलाव जरूरी था। गिरने वाला व्यक्ति बेहोश लग रहा है। क्या यह नाटक है या सच? सस्पेंस बना हुआ है।

शांत लेकिन खतरनाक

ग्रे जैकेट वाली पात्र की आंखों में एक अलग ही चमक है। वह शांत खड़ी है लेकिन तूफान ला सकती है। उसकी पकड़ मजबूत है और इरादे साफ हैं। कारोबारी युद्ध में वह अकेली लड़ रही है। असली वारिस: खाली हाथ पर हौसले बुलंद में उसका किरदार मजबूत लगता है। समाचार माध्यम के माइक उसके सामने हैं लेकिन वह डरी नहीं। यह साहस देखकर अच्छा लगा। सशक्तिकरण का अच्छा संदेश है।

चश्मे वाले की चिंता

ब्राउन सूट और चश्मे वाला व्यक्ति बहुत अमीर लगता है। उसके पीछे लोग खड़े हैं लेकिन वह अकेला महसूस कर रहा है। उसकी नजरें ग्रे वाली पात्र से टकरा रही हैं। बीच में कोई बात नहीं हो रही बस घूरना है। असली वारिस: खाली हाथ पर हौसले बुलंद में यह चुप्पी बेहतरीन है। कार्यालय का माहौल बहुत पेशेवर है। दीवार पर लाल बैनर त्योहार का संकेत दे रहे हैं। विरोधाभास बहुत गहरा है।

मीडिया का हंगामा

समाचार माध्यम वाले लोग जैसे ही आए, माहौल बदल गया। अब यह निजी लड़ाई नहीं सार्वजनिक मुद्दा बन गया है। कैमरे रिकॉर्ड कर रहे हैं और सबूत बन रहा है। ग्रे वाली पात्र को घेर लिया गया है। असली वारिस: खाली हाथ पर हौसले बुलंद में मीडिया का रोल अहम है। सच सामने आएगा या दब जाएगा? यह सवाल हर किसी के मन में है। दृश्य की गुणवत्ता भी बहुत अच्छी है।

मासूम पर आक्रामक

बेरेट वाली लड़की बहुत मासूम लगती है लेकिन उसने जो किया वह खतरनाक था। उसकी चोटी और कपड़े प्यारे हैं लेकिन गुस्सा भयानक है। हरे शर्ट वाला व्यक्ति दर्द में कराह रहा है। काली ड्रेस वाली पात्र उसे सहारा देने की कोशिश कर रही है। असली वारिस: खाली हाथ पर हौसले बुलंद में हर किरदार का अपना रंग है। यह दृश्य बहुत ही ऊर्जावान है। दर्शक बंधे रहते हैं।

घबराहट का असली चेहरा

काली चमकदार ड्रेस वाली पात्र की घबराहट साफ दिख रही है। उसके कानों में झूमके हैं लेकिन चेहरे पर पसीना है। वह गिरे हुए व्यक्ति के पास बैठ गई है। उसे लग रहा है कि सब खत्म हो गया। असली वारिस: खाली हाथ पर हौसले बुलंद में भावनात्मक सीन बहुत अच्छे हैं। उसकी आवाज में दर्द है। क्या वह उसे बचा पाएगी? यह चिंता बढ़ती जा रही है। अभिनय बहुत स्वाभाविक लग रहा है।

भव्य सेट डिजाइन

कंपनी के सभागार का सेट बहुत भव्य है। कांच की दीवारें और चिन्ह साफ दिख रहे हैं। सुरक्षाकर्मी वर्दी में सख्त खड़े हैं। यह पावर का प्रतीक है। असली वारिस: खाली हाथ पर हौसले बुलंद की निर्माण मूल्य अच्छी है। फर्श पर प्रतिबिंब दिख रहा है। रोशनी बहुत तेज है जो तनाव को बढ़ाती है। हर बारीकी पर ध्यान दिया गया है। सेट डिजाइनर की तारीफ करनी चाहिए।

कागजों की ताकत

वह भूरा लिफाफा कहानी की कुंजी है। उस पर लाल अक्षरों में कुछ लिखा है। ग्रे वाली पात्र उसे हथियार की तरह पकड़े है। शायद इसमें राज़ हैं। असली वारिस: खाली हाथ पर हौसले बुलंद में यह सामग्री बहुत महत्वपूर्ण है। दस्तावेजों से बड़ी लड़ाई लड़ी जा रही है। कारोबारी दुनिया में कागज ही ताकत है। यह सीन बहुत यथार्थवादी लगता है। दस्तावेजों की ताकत दिखाई गई है।

अंतहीन सवाल

पूरी कहानी में एक रहस्य बना हुआ है। कौन सच्चा वारिस है? कौन झूठ बोल रहा है? हर सीन में नया सवाल खड़ा होता है। असली वारिस: खाली हाथ पर हौसले बुलंद देखकर मैं हैरान हूं। गिरने वाला सीन चरम सीमा लगता है। लेकिन असली खेल तो अब शुरू होगा। ऐसे धारावाहिक कम मिलते हैं। मुझे अगली कड़ी देखने की जल्दी है। कहानी बहुत पेचीदा है।