इस दृश्य में तनाव इतना ज्यादा है कि सांस रुक जाती है। काली पोशाक वाली महिला के हाथ में विस्फोटक यंत्र है और उसकी आंखों में दर्द साफ दिख रहा है। सामने खड़ा विशेष वर्दी वाला शख्स शांत है लेकिन उसकी नजरों में चिंता है। खतरनाक डैडी: बेटी का बॉडीगार्ड ने इस सीन से मेरी नींद उड़ा दी। नेटशॉर्ट पर देखते वक्त लगा कि कहीं बम न फट जाए। अभिनय बहुत दमदार है। हर पल दिल की धड़कन बढ़ जाती है।
जब स्क्रीन पर वो छोटी बच्ची काले हेलमेट और सुरक्षा कवच पहनकर आई तो मैं दंग रह गया। इतनी छोटी उम्र में इतनी बड़ी जिम्मेदारी कैसी?शायद वो हीरो की बेटी है जो अपने पिता को बचाने आई है। खतरनाक डैडी: बेटी का बॉडीगार्ड की कहानी में ये मोड़ बहुत गहरा है। बच्चे का मासूम चेहरा और हाथ में पकड़ा सामान देखकर रोंगटे खड़े हो गए। बच्ची की आंखों में डर नहीं बल्कि बहादुरी दिख रही थी। ये बहुत प्रेरणादायक है। ये सीन कभी नहीं भूलूंगा।
कमरे में बंधी हुई महिलाएं डर से कांप रही हैं। रस्सियों से बंधी वो औरतें बेचारी कुछ कर नहीं सकतीं। विलेन की जिद सबकी जान ले सकती है। खतरनाक डैडी: बेटी का बॉडीगार्ड में दिखाया गया ये खौफनाक माहौल असली लगता है। हर किसी की जान खतरे में है और हीरो के पास कोई रास्ता नहीं बचा है। बस एक गलती और सब खत्म। सस्पेंस बना हुआ है। दर्शक के तौर पर मैं भी वहीं फंस गया महसूस कर रहा था।
हीरो बिना कुछ बोले अपनी आंखों से सब कह रहा है। वो विलेन को समझाने की कोशिश कर रहा है लेकिन वो मानने को तैयार नहीं है। जमीन पर पड़े लोग बता रहे हैं कि पहले ही काफी हो चुका है। खतरनाक डैडी: बेटी का बॉडीगार्ड में कार्रवाई के साथ भावनाएं भी बहुत हैं। हीरो की मजबूरी देखकर दिल दुखी हो जाता है। क्या वो सबको बचा पाएगा?ये सवाल हर पल उभरता है। मुझे ये अनिश्चितता बहुत पसंद आई।
सिर्फ हीरो नहीं, विलेन भी रो रही है। उसकी आंखों में आंसू और हाथ में बम है। शायद उसे भी मजबूरी में ये कदम उठाना पड़ा है। खतरनाक डैडी: बेटी का बॉडीगार्ड ने दिखाया कि हर विलेन की कहानी होती है। काली साड़ी वाली महिला का गुस्सा जायज लग रहा है। ये जटिलता कहानी को और भी दिलचस्प बनाती है। मुझे ये परतदार किरदार बहुत पसंद आए। पात्रों की गहराई देखकर हैरानी हुई।
शुरू में ही फर्श पर पड़े हुए लोग देखकर अंदाजा हो जाता है कि लड़ाई कितनी भयानक थी। हीरो अकेला खड़ा है लेकिन हारा नहीं है। खतरनाक डैडी: बेटी का बॉडीगार्ड का ये सीन एक्शन प्रेमियों के लिए किसी दावत से कम नहीं। धूल और मिट्टी के बीच ये जंग देखकर रोंगटे खड़े हो गए। अब बारी है आखिरी मुकाबले की। कौन जीतेगा ये तो वक्त बताएगा। मैं बस यही देखना चाहता हूं।
लगता है हीरो सिर्फ अपनी जान नहीं बल्कि अपने परिवार को बचाने की लड़ाई लड़ रहा है। बूढ़ी महिला और युवतियां सब उससे उम्मीद लगाए हैं। खतरनाक डैडी: बेटी का बॉडीगार्ड में परिवार के बंधन को बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है। पिता का प्यार और जिम्मेदारी इस किरदार में साफ झलकती है। ऐसे सीन देखकर अपने पिता की याद आ जाती है। बहुत भावनात्मक पल है। आंखें नम हो गईं।
उस लाल बटन पर उंगली रखते ही पूरा हॉल सन्न रह गया। एक छोटी सी चूक सबको खत्म कर सकती है। खतरनाक डैडी: बेटी का बॉडीगार्ड में इस वस्तु का इस्तेमाल बहुत चतुराई से हुआ है। कैमरा कोण भी बहुत तनावपूर्ण है। दर्शक के तौर पर मैं भी वहीं फंस गया महसूस कर रहा था। निर्देशन की दाद देनी होगी। ये सीन सिनेमा जैसा लग रहा था। बहुत प्रभावशाली दृश्य था। तकनीकी पहलुओं पर भी ध्यान दिया गया है।
आगे क्या होगा ये जानने की उत्सुकता बढ़ती जा रही है। क्या विलेन बम फटाएगी या हीरो उसे रोक पाएगा?खतरनाक डैडी: बेटी का बॉडीगार्ड का हर भाग नया सस्पेंस लेकर आता है। नेटशॉर्ट ऐप पर लगातार देखना बहुत मजा आ रहा है। कहानी में उतार चढ़ाव बहुत है। बोरियत का नामोनिशान नहीं है। बस देखते ही जाओ और हैरान होते जाओ। मैं अगले भाग का इंतजार कर रहा हूं।
गोदाम का मंच और पोशाक की बारीकियां बहुत शानदार हैं। विशेष वर्दी से लेकर बच्चों के कपड़े सब कुछ असली लगता है। खतरनाक डैडी: बेटी का बॉडीगार्ड की निर्माण गुणवत्ता इतनी अच्छी है कि बड़ी लागत वाली फिल्म लगती है। रोशनी और ध्वनि व्यवस्था भी लाजवाब है। हर फ्रेम में मेहनत साफ झलकती है। दर्शक के तौर पर ये सुकून देने वाली बात है। ऐसे कथानक को सपोर्ट करना चाहिए। मुझे ये श्रृंखला बहुत पसंद आ रही है।