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खतरनाक डैडी: बेटी का बॉडीगार्डवां56एपिसोड

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खतरनाक डैडी: बेटी का बॉडीगार्ड

देश के सबसे बड़े जासूसी दल का सबसे खतरनाक एजेंट, जिसे 'मौत का बादशाह' कहा जाता था। पत्नी के गर्भवती होने पर उसने दुनिया छोड़ दी। पाँच साल बाद वह एक साधारण घरेलू पिता बन चुका है। एक दिन उसकी साली पर गुंडों ने जुल्म किया – तब उसने अपनी असली पहचान सामने रख दी।
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इस एपिसोड की समीक्षा

भावनाओं का तूफान

इस दृश्य में तनाव इतना अधिक था कि सांस रुक गई। काली पोशाक वाली नायिका की आंखों में आंसू देखकर दिल पिघल गया। वह बटन दबाने वाली थी पर रुक गई। खतरनाक डैडी: बेटी का बॉडीगार्ड का यह भाग बहुत भावुक है। कमांडो की कोशिशें रंग लाईं। अंत में जब वह गिरी तो सब चौंक गए। यह कहानी बहुत गहरी है और हर मोड़ पर नया बदलाव देती है। दर्शकों को यह पसंद आएगा। पृष्ठभूमि संगीत भी बहुत सही था।

गोदाम का डरावना सच

गोदाम का सेट बहुत ही असली लग रहा था। जमीन पर पड़े हुए लोग और बंधक बच्चों का डर साफ दिख रहा था। छोटी बच्ची ने कमांडो टोपी पहनी थी जो बहुत प्यारी लगी। खतरनाक डैडी: बेटी का बॉडीगार्ड में ऐसे दृश्य बार बार देखने को मिलते हैं। लड़ाई और भावनाओं का बेहतरीन मिश्रण है। नायक की वर्दी भी बहुत स्टाइलिश लग रही थी। यह कार्यक्रम बिल्कुल निराश नहीं करता।

विलेन की हार

फर कोट वाले व्यक्ति के घायल होने का दृश्य बहुत चौंकाने वाला था। उसे लगा था वह जीत गया पर ऐसा नहीं हुआ। काली साड़ी वाली नायिका ने सबको हैरान कर दिया। खतरनाक डैडी: बेटी का बॉडीगार्ड की कहानी में कई राज छिपे हैं। क्यों वह रो रही थी? क्या मजबूरी थी? ये सवाल दिमाग में घूम रहे हैं। अगली कड़ी देखने की बेसब्री बढ़ गई है।

रिश्तों की जंग

जब कमांडो ने उसे पकड़ा तो लगा जैसे समय थम गया हो। उसकी आंखों में चिंता साफ झलक रही थी। बंधक बनाए गए लोग भी डरे हुए थे। खतरनाक डैडी: बेटी का बॉडीगार्ड में रिश्तों की यह जंग देखने लायक है। हर किरदार का अपना वजन है। संवाद भी बहुत दमदार थे। ऐसे कार्यक्रम कम ही मिलते हैं जो दिल को छू जाएं।

त्रिग्गर पर उंगली

विस्फोटक वाला दृश्य बहुत ही खतरनाक था। उंगली बस त्रिग्गर पर थी। सबकी नजरें उसी पर टिकी थीं। खतरनाक डैडी: बेटी का बॉडीगार्ड का यह अंत बहुत तेज है। संपादन बहुत तेज था जिससे बोरियत नहीं हुई। काली पोशाक वाली का दर्द असली लग रहा था। अभिनय में दम था। हर पल में उत्सुकता बनी रही।

बच्ची की मासूमियत

बच्ची का मासूम चेहरा देखकर बुरा लगा। उसे इस उम्र में यह सब नहीं देखना चाहिए। पर कहानी की मजबूरी थी। खतरनाक डैडी: बेटी का बॉडीगार्ड में परिवार की सुरक्षा मुख्य विषय है। पिता का प्यार और जिम्मेदारी साफ दिखती है। यह कार्यक्रम परिवार के साथ देखने योग्य है। कार्रवाई के साथ भावनाएं भी बराबर हैं।

सिनेमाई अंदाज

अंत में जब वह बेहोश हुई तो नायक ने संभाल लिया। यह देखभाल वाला पक्ष बहुत अच्छा लगा। लगता है दोनों के बीच कुछ पुराना रिश्ता है। खतरनाक डैडी: बेटी का बॉडीगार्ड में ऐसे मोड़ आम बात हैं। दर्शक हैरान रह जाते हैं। सेट सजावट और रोशनी भी बहुत पेशेवर थी। हर दृश्य सिनेमा जैसा लग रहा था।

मजबूत पटकथा

खलनायक की योजना कुछ और थी पर परिणाम कुछ और निकला। जमीन पर पड़े गुंडे अब कुछ नहीं कर सकते थे। खतरनाक डैडी: बेटी का बॉडीगार्ड की पटकथा बहुत मजबूत है। कोई भी दृश्य बेकार नहीं है। कलाकारों की केमिस्ट्री भी बहुत अच्छी है। यह कार्यक्रम नेटफ्लिक्स जैसी गुणवत्ता देता है। बिल्कुल छोड़ना नहीं चाहिए।

उलझन में नायिका

आंसू और गुस्सा दोनों एक साथ देखने को मिले। काली पोशाक वाली नायिका उलझन में थी। उसे क्या चुनना है यह स्पष्ट नहीं था। खतरनाक डैडी: बेटी का बॉडीगार्ड में किरदारों की गहराई है। सिर्फ लड़ाई नहीं है। भावनात्मक यात्रा भी बहुत अच्छी है। यह कार्यक्रम दिल पर असर करता है।

नेटशॉर्ट का कमाल

पूरा भाग एक ही जगह पर फिल्माया गया पर बोरिंग नहीं लगा। तनाव बनाए रखना आसान नहीं है। खतरनाक डैडी: बेटी का बॉडीगार्ड ने यह कर दिखाया। निर्देशन बहुत शानदार था। कैमरा कोनों ने दृश्य को और भी तीव्र बना दिया। यह कार्यक्रम कार्रवाई प्रेमियों के लिए सबसे अच्छा है। नेटशॉर्ट ऐप पर देखने का मजा आया।