नीले पोशाक वाले युवक ने जब वह विशाल पत्थर उठाया तो सबकी सांसें रुक गईं। उसकी मांसपेशियों में तनाव और चेहरे पर पसीना देखकर लग रहा था जैसे वह अपनी पूरी ताकत झोंक रहा हो। खूनी तलवार: एक पिता का इंतकाम में ऐसे दृश्य दर्शकों को बांधे रखते हैं। पीछे खड़े लोग हैरानी से देख रहे थे, खासकर पीले कपड़े वाली लड़की की आंखों में अचंभा साफ दिख रहा था।
जब नीले पोशाक वाले ने पत्थर गिरा दिया तो सब हंसने लगे। हरे पोशाक वाले तो इतने जोर से हंसे कि उनकी आवाज पूरे आंगन में गूंज गई। खूनी तलवार: एक पिता का इंतकाम में ऐसे हल्के-फुल्के पल तनाव को कम करते हैं। बूढ़े गुरुजी का गंभीर चेहरा और बाकी लोगों की हंसी का कंट्रास्ट बहुत अच्छा लगा। लगता है यह कोई प्रतियोगिता या परीक्षा थी।
पीले कपड़े वाली लड़की पूरे समय चुपचाप खड़ी रही। उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं था, लेकिन आंखों में कुछ छिपा हुआ लग रहा था। जब वह पत्थरों के पास गई तो लगा जैसे वह कुछ सोच रही हो। खूनी तलवार: एक पिता का इंतकाम में ऐसे किरदार अक्सर कहानी का मोड़ बनते हैं। उसके बालों में पीले फूल और सादा पोशाक उसे दूसरों से अलग दिखाती है।
बूढ़े गुरुजी का चेहरा पूरे समय गंभीर रहा। वे सब कुछ देख रहे थे लेकिन कुछ नहीं बोले। उनकी आंखों में अनुभव और समझ दिख रही थी। खूनी तलवार: एक पिता का इंतकाम में ऐसे पात्र कहानी की गहराई बढ़ाते हैं। जब नीले पोशाक वाले ने पत्थर उठाया तो गुरुजी ने सिर्फ एक नजर देखा, जैसे वे पहले से जानते हों कि क्या होगा।
हरे पोशाक वाला व्यक्ति बहुत ही शरारती लग रहा था। वह बार-बार हंस रहा था और दूसरों का मजाक उड़ा रहा था। जब नीले पोशाक वाले ने पत्थर गिराया तो वह सबसे जोर से हंसा। खूनी तलवार: एक पिता का इंतकाम में ऐसे किरदार कॉमेडी रिलीफ देते हैं। उसके कपड़े बहुत महंगे लग रहे थे, शायद वह किसी अमीर परिवार से है।