यह दृश्य देखकर हंसी नहीं रुक रही है! अमीर जोड़े का फूड बैंक में आना और वॉलंटियर को घूरना बिल्कुल वैसा ही है जैसा झुग्गी का अरबपति में दिखाया गया था। उनकी नकली मुस्कान और ऊपर से नीचे तक देखने का अंदाज साफ बताता है कि वे कितने घमंडी हैं। असली इंसानियत तो उस लड़की में है जो मेहनत कर रही है।
उस नीली वेस्ट वाली लड़की का धैर्य कमाल का है। इतने अकड़ू लोगों के सामने खड़ी होकर भी वह अपना काम कर रही है। जब वे लोग आते हैं तो उसका चेहरा उतर जाता है, पर वह कुछ बोलती नहीं। लगता है जैसे झुग्गी का अरबपति की कहानी में कोई नया मोड़ आने वाला हो। काश हर कोई इतना संयमी हो पाए।
चमकदार ड्रेस और फर कोट पहनकर फूड बैंक आना कितना अजीब लगता है! यह जोड़ा शायद यह दिखाने आया है कि वे कितने अमीर हैं, पर असल में वे कितने खोखले हैं। झुग्गी का अरबपति में भी ऐसे ही पात्र थे जो दिखावे के पीछे भागते थे। असली अमीरी तो दिल की होती है, जो इनके पास बिल्कुल नहीं है।
जैसे ही वह हल्की नीली कोट वाला शख्स आया, माहौल बदल गया। उसकी चाल में एक अलग ही घमंड था। वह लड़की के पास गया और ऐसे देखा जैसे उसे खरीद रहा हो। यह दृश्य बिल्कुल झुग्गी का अरबपति के क्लाइमेक्स जैसा लगा। लगता है अब कहानी में बड़ा ट्विस्ट आने वाला है।
महंगी गाड़ी से उतरना और सीधे फूड बैंक की तरफ भागना... यह क्या मजाक है? लगता है ये लोग किसी रियलिटी शो का हिस्सा हैं। झुग्गी का अरबपति में भी ऐसे ही पात्र थे जो गरीबों की मदद के नाम पर अपना प्रमोशन करते थे। असली मदद तो चुपचाप की जाती है, शोर मचाकर नहीं।