उस चूबे बच्चे की प्रतिक्रिया देखकर हंसी आ गई। जब सब डरे हुए थे, वो मशीन देखकर खुश हो गया। बचपन की मासूमियत ऐसी ही होती है। मेरे पापा, देश के हीरो में ऐसे कॉमेडी पल गंभीर माहौल को हल्का कर देते हैं। एनिमेशन की क्वालिटी भी काफी अच्छी लगी मुझे। घर की तबाही के बीच उसकी खुशी देखकर लगा कि शायद उसे खतरा समझ ही नहीं आया। वैसे भी बच्चों को रोबोट पसंद होते हैं।
बैंगनी सूट वाले आदमी का पसीना साफ दिखा रहा था कि वो कुछ छिपा रहा है। पुलिस के आते ही उसकी हालत खराब हो गई। काश हमें पहले से पता होता कि उसने क्या गड़बड़ की है। मेरे पापा, देश के हीरो की कहानी में यह सस्पेंस बना हुआ है। लक्जरी घर और फिर पुलिस की एंट्री, ड्रामा काफी बढ़िया है। उसकी घबराहट देखकर लगता है कि अब उसकी पकड़ पक्की है।
जनरल साहब की एंट्री ही कुछ अलग थी। उनकी आंखों में एक अलग ही कड़क थी। बिना कुछ कहे ही वो कमरे का माहौल बदल देते हैं। मेरे पापा, देश के हीरो में ऐसे किरदार कहानी को वजन देते हैं। उनकी वर्दी और बैठने का तरीका सब कुछ अनुशासन दिखा रहा था। शायद वो ही असली ताकत हैं जो पीछे से सब चल रहे हैं। बहुत ही प्रभावशाली किरदार लगा।
छत तोड़कर जब वो रोबोट अंदर आया तो सीन बहुत धमाकेदार था। टुकड़े उड़ते हुए और धूल का गुबार, सब कुछ रियल लगा। मेरे पापा, देश के हीरो में एक्शन सीन्स की तैयारी बहुत अच्छी है। उस विशाल मशीन के सामने घर की हालत खराब हो गई। पायलट का चेहरा भी काफी सीरियस था। ऐसा लग रहा था कि अब कोई बड़ा मिशन शुरू होने वाला है।
लेपर्ड प्रिंट वाली महिला काफी रहस्यमयी लग रही थी। शुरू में वो शांत थी लेकिन पुलिस की आहट से सब बदल गया। मेरे पापा, देश के हीरो में महिला किरदारों को भी अच्छे से दिखाया गया है। उसके गहने और कपड़े दिखाते हैं कि वो अमीर परिवार से है। लेकिन जब मुसीबत आई तो वो भी घबरा गई। उसकी आंखों में डर साफ दिखाई दे रहा था उस पल।