समुद्र पर चलने वाला यह युद्ध दृश्य सच में दिल दहला देने वाला है। मिसाइलों की आवाज़ और विस्फोट देखकर रोंगटे खड़े हो गए। जब जहाज जल रहे थे, तब लगा कि मेरे पापा, देश के हीरो वाली भावना असली योद्धाओं में होती है। एनिमेशन इतना बेहतरीन है कि हर पल सांस रुक जाती है। नेवी की ताकत को इस तरह दिखाना आसान नहीं है, लेकिन यहाँ कमाल कर दिया गया है। दर्शक इसका आनंद जरूर लेंगे।
पायलट की आँखों में जो डर और जुनून दिखा, वो लाजवाब था। कॉकपिट के अंदर का तंग माहौल बखूबी कैद किया गया है। ऊपर आसमान में लड़ाई चल रही थी और नीचे समुद्र में तबाही, बस यही तो मेरे पापा, देश के हीरो की असली परिभाषा है। जब विमान कैरियर से उड़ान भरते हैं, तो गर्व महसूस होता है। एक्शन दृश्यों में जो रफ़्तार है, वो किसी बड़ी फिल्म से कम नहीं लगती। यह दृश्य बहुत प्रभावशाली है।
कमांड सेंटर में तनाव इतना था कि स्क्रीन के बाहर भी पसीने आ गए। बड़े अफसर और युवा अधिकारी के बीच की बहस कहानी को गहराई देती है। रेडार स्क्रीन पर लाल बिंदु देखकर लगता है कि मौत सामने खड़ी है। मेरे पापा, देश के हीरो जैसे नाटक में ऐसे संवाद ही जान डाल देते हैं। टूटे हुए उपकरण और बिखरे कागज़ हालात की गंभीरता बता रहे थे। यह सिर्फ युद्ध नहीं, दिमाग की लड़ाई भी है।
बेस पर बमबारी का दृश्य देखकर सदमा लगा। हंगार जल रहे थे और धुएं का गुबार आसमान तक पहुँच रहा था। जमीन पर खड़े सैनिकों की बेबसी साफ झलक रही थी। मेरे पापा, देश के हीरो में ऐसे दृश्य दर्शकों को बांधे रखते हैं। टैंक और गन के इस्तेमाल से लगता है कि बचाव की आखिरी उम्मीदें भी बुझ रही हैं। रंगों का इस्तेमाल आग और तबाही को दिखाने के लिए बहुत प्रभावशाली किया गया है सच में।
युवा अधिकारी के चेहरे पर जो थकान और गंदगी थी, वो असली संघर्ष दिखाती है। वह भागते हुए गलियारे में अकेला था, लाल बत्तियां चेतावनी दे रही थीं। मेरे पापा, देश के हीरो की कहानी में ऐसे पल इंसानियत को छूते हैं। उसकी आँखों में आंसू और गुस्सा दोनों थे। जब वह दरवाजे से बाहर निकला, तो लगा कि वह किसी अहम मिशन पर जा रहा है। कैमरे की नज़र ने उसकी अकेलेपन को बहुत खूबसूरती से उभारा है।