उस छोटी लड़की को देखकर हैरानी हुई जब वह विशाल रोबोट के पास गई। उसकी मासूमियत और उस मशीन की ताकत का अंतर बहुत अच्छा था। कॉकपिट में बैठते ही उसकी आंखों में चमक देखने लायक थी। मेरे पापा, देश के हीरो में ऐसे सीन दिल को छू लेते हैं। एनिमेशन की क्वालिटी भी बहुत शानदार है, हर डिटेल पर ध्यान दिया गया है।
रात के शहर में उस विशाल रोबोट का चलना किसी सपने जैसा लग रहा था। स्ट्रीट लाइट्स की रोशनी में उसकी बॉडी चमक रही थी। जब वह गली से गुजरा तो वहां बैठे लोगों की हालत खराब हो गई। डर और आश्चर्य का मिश्रण साफ दिखाई दिया। एक्शन सीक्वेंस बहुत ही स्मूथ हैं और देखने में बहुत मजा आता है।
गली में बैठे उन लड़कों का रिएक्शन देखकर हंसी भी आई और डर भी लगा। जब उन्हें लगा कि कोई मुसीबत आ गई है, तो उनके चेहरे के भाव बदल गए। एक ने तो बोतल भी गिरा दी। ऐसे छोटे-छोटे डिटिल्स कहानी को असली बनाते हैं। नेटशॉर्ट ऐप पर यह सीरीज देखना एक अलग ही अनुभव है।
पुलिस कंट्रोल रूम का सीन बहुत ही तनावपूर्ण था। स्क्रीन पर नीले रंग का इंटरफेस और ऑपरेटर की गंभीरता बता रही थी कि कुछ बड़ा होने वाला है। टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कहानी में बहुत अच्छे से दिखाया गया है। मेरे पापा, देश के हीरो की कहानी में यह ट्विस्ट बहुत जरूरी था। अब देखना है कि आगे क्या होता है।
काले चश्मे वाला वह शख्स बहुत रहस्यमयी लग रहा था। उसके माथे पर निशान और गंभीर चेहरा बता रहा है कि वह कोई आम इंसान नहीं है। जब उसने आसमान की तरफ देखा, तो लगा कि वह सब कुछ जानता है। उसका किरदार आगे चलकर बहुत अहम साबित हो सकता है। एक्टिंग और एक्सप्रेशन बहुत दमदार हैं।