डॉक्टर आता है, बैग खोलता है, लेकिन कोई जांच नहीं करता। बस बातें करता है और चला जाता है। क्या वह सच में डॉक्टर है? या फिर कोई और खेल चल रहा है? वह गई, बर्फ़ गिरी — शायद यह सब एक नाटक था।
वह हर पल उसके पास है, हाथ पकड़े हुए, गले लगाए हुए। लेकिन क्या यह प्यार है या फिर एक तरह का नियंत्रण? उसकी मुस्कान के पीछे छिपा डर साफ दिख रहा है। वह गई, बर्फ़ गिरी — शायद वह आज़ाद होना चाहती थी।
वह फोन पर बात कर रही थी, अचानक कोई आया और फोन छीन लिया। फोन जमीन पर गिर गया। क्या यह संयोग था या जानबूझकर किया गया? वह गई, बर्फ़ गिरी — शायद उसकी आवाज़ दबानी थी।
नौकर खड़ा है, कुछ नहीं बोलता। बस देखता रहता है। क्या वह सब जानता है? या फिर डर के मारे चुप है? वह गई, बर्फ़ गिरी — शायद वह भी इस खेल का हिस्सा है।
वह सफेद कपड़े पहने है, जो मासूमियत दिखाते हैं। लेकिन उसकी आँखों में इतना दर्द क्यों है? क्या सफेद कपड़े उसके दर्द को छिपाने के लिए हैं? वह गई, बर्फ़ गिरी — शायद वह अंदर से टूट चुकी है।
डॉक्टर चला गया, लेकिन उसकी बातें अधूरी लग रही हैं। क्या उसने कुछ छिपाया? या फिर वह खुद डरा हुआ था? वह गई, बर्फ़ गिरी — शायद सच कभी सामने नहीं आएगा।
वह मुस्कुराती है, लेकिन उसकी आँखें रो रही हैं। क्या यह मुस्कान दूसरों को धोखा देने के लिए है? या फिर वह खुद को समझाने की कोशिश कर रही है? वह गई, बर्फ़ गिरी — शायद वह अकेली है।
उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक है। क्या यह प्यार की चमक है या फिर जीत की? वह सब कुछ नियंत्रित कर रहा है। वह गई, बर्फ़ गिरी — शायद वह अपनी जीत का जश्न मना रहा है।
क्या वह आज़ाद होगी? या फिर हमेशा के लिए इस पिंजरे में रहेगी? डॉक्टर, नौकर, पुरुष — सब कुछ संदेह से भरा है। वह गई, बर्फ़ गिरी — शायद यह कहानी अभी खत्म नहीं हुई है।
जब वह सोफे पर बैठती है, तो उसकी आँखों में एक अजीब सी खामोशी है। पुरुष का हाथ उसके कंधे पर है, लेकिन वह अभी भी अकेली लग रही है। डॉक्टर के आने के बाद भी उसकी मुस्कान झूठी लगती है। वह गई, बर्फ़ गिरी — शायद यही उसकी कहानी का सच है।