जब वह अस्पताल के बिस्तर पर जागी, तो उसकी आँखों में डर था। उसने देखा कि उसके पास कौन बैठा है। अरबपति का रक्षक की कहानी में यह पल सबसे ज्यादा तनावपूर्ण है। उसकी सांसें तेज हो गईं, और वह कुछ बोलना चाहती थी, पर शब्द गले में अटक गए।
पहले ही दृश्य में पैसे गिनते हुए हाथ दिखाई दिए। फिर वह लड़की रोती हुई दिखी। अरबपति का रक्षक में यह स्पष्ट करता है कि पैसा ही सब कुछ नहीं होता। कभी-कभी इंसान अपनी जान बचाने के लिए भी कुछ भी कर सकता है।
एक हाथ में चाकू, दूसरे में खून। वह लड़की क्या करने वाली थी? अरबपति का रक्षक में यह दृश्य दर्शकों को झटका देता है। क्या वह खुद को बचाने के लिए तैयार थी? या फिर वह किसी और को मारना चाहती थी?
उसकी आँखों से आंसू बह रहे थे, पर वह मुस्कुरा रही थी। अरबपति का रक्षक में यह विरोधाभास बहुत गहरा है। क्या वह खुश थी या डरी हुई? कभी-कभी इंसान अपने डर को छुपाने के लिए मुस्कुराता है।
अस्पताल की रात बहुत लंबी लगती है। वह लड़की अकेली थी, पर उसके पास कोई था जो उसके पास बैठा था। अरबपति का रक्षक में यह दृश्य दर्शाता है कि कभी-कभी एक व्यक्ति ही सब कुछ बदल सकता है।