जब वह अस्पताल के बिस्तर पर लेटी थी, तो उसकी आँखों में डर और उम्मीद दोनों थे। उस लड़के ने फूल रखे, पर उसकी आवाज़ में कुछ छिपा था। अरबपति का रक्षक जैसे लग रहा था वह, जो चुपचाप सब देख रहा था। हर नज़र में एक कहानी थी, हर खामोशी में एक सवाल।
उसने फूल दिए, मुस्कुराया, पर उसकी आँखें कुछ और कह रही थीं। वह लड़की बिस्तर पर लेटी थी, पर उसका दिल कहीं और था। अरबपति का रक्षक की तरह खड़ा वह दूसरा आदमी, सब कुछ समझ रहा था। यह सिर्फ मुलाकात नहीं, एक तूफान की शुरुआत थी।
तीन लोग, एक कमरा, और हजारों अनकहे शब्द। वह लड़की बीच में थी, जैसे कोई फैसला उसी पर टिका हो। एक ने फूल दिए, दूसरे ने चुप्पी तोड़ी। अरबपति का रक्षक की तरह खड़ा वह आदमी, सब कुछ नाप रहा था। हर नज़र में एक राज़ था।
उसकी मुस्कान झूठी थी, आँखों में दर्द छिपा था। वह लड़का जो फूल लाया, उसकी बातों में कुछ अटका था। अरबपति का रक्षक की तरह खड़ा वह दूसरा, सब कुछ समझ रहा था। यह सिर्फ अस्पताल का कमरा नहीं, एक भावनाओं का युद्धक्षेत्र था।
कमरे में खामोशी थी, पर हर सांस में शोर था। वह लड़की बिस्तर पर लेटी थी, पर उसका मन भाग रहा था। एक ने बात की, दूसरे ने देखा। अरबपति का रक्षक की तरह खड़ा वह आदमी, सब कुछ नाप रहा था। हर पल एक नया मोड़ ले रहा था।