जब वो सुबह उठी और फोन पर ताज़ा ख़बर देखी, तो उसके चेहरे पर डर साफ झलक रहा था। अरबपति का रक्षक में ऐसे मोड़ दर्शकों को बांधे रखते हैं। उसकी आंखों में बेचैनी थी, जैसे कुछ गलत होने वाला हो। फिर वो शख्स आया, बिना कमीज के, तौलिया से बदन पोंछता हुआ — और फिर भी उसकी मौजूदगी में एक अजीब सा आकर्षण था।
वो बिस्तर पर बैठी थी, चादर ओढ़े, और वो उसके पास आकर बैठ गया। उनकी बातचीत में वो गहराई थी जो सिर्फ रिश्तों में ही होती है। अरबपति का रक्षक के इस सीन में भावनाओं का ऐसा बहाव था कि लगता था जैसे समय थम गया हो। उसने उसका हाथ थामा, और फिर धीरे से उसके गाल को छू लिया — बस इतना सा स्पर्श, पर दिल को छू गया।
जैसे ही वो कमरे से बाहर निकला, उसकी आंखों में एक अजीब सी चमक थी। शायद वो जानता था कि अब कुछ बदलने वाला है। अरबपति का रक्षक में ऐसे पल बहुत आते हैं जहां बिना संवाद के ही कहानी आगे बढ़ जाती है। वो लड़की अभी भी बिस्तर पर बैठी थी, फोन हाथ में, जैसे इंतज़ार कर रही हो कि अब क्या होगा।
एक अलग घर, अलग माहौल — दीवारों पर फूलों वाला पेपर, सोफे पर बैठे आदमी के हाथ में शराब की बोतल। औरत खड़ी है, गुस्से में, बांहें बांधे हुए। अरबपति का रक्षक में ऐसे विरोधाभास बहुत अच्छे से दिखाए गए हैं। लगता है जैसे दो अलग-अलग दुनियाएं एक दूसरे से टकराने वाली हैं।
वो औरत गुस्से में कुछ कह रही थी, पर उस आदमी के चेहरे पर मुस्कान थी। शायद वो जानता था कि ये गुस्सा जल्दी ही शांत हो जाएगा। अरबपति का रक्षक में ऐसे रिश्ते दिखाए गए हैं जो असली लगते हैं। फिर वो लड़की आई, पीले रंग की ब्लॉउज में, और सबकी नज़रें उस पर टिक गईं।