अरबपति का रक्षक में प्रेम और दुख का अनोखा संगम है। पहले दृश्य में जो गर्माहट थी, वही अंत में टूटने का दर्द देती है। फूलों वाला सीन बहुत भावुक था, जैसे खुशी के बीच मौत का साया हो। अभिनेताओं की केमिस्ट्री दिल को छू लेती है।
इस लघु फिल्म ने मुझे हंसाया भी और रुलाया भी। शुरू में जो घनिष्ठता थी, वह अंत में एक दुखद लेकिन खूबसूरत मोड़ ले लेती है। अरबपति का रक्षक की कहानी सरल लेकिन गहरी है। फूलों का प्रतीक बहुत अच्छा लगा।
क्या प्यार इतना महंगा होता है? अरबपति का रक्षक में यही सवाल उठता है। एक पल की खुशी और फिर हमेशा के लिए बिछड़ना। अभिनेत्री का चेहरा जब वह चीखती है, वह दृश्य दिल दहला देता है। बहुत ही भावुक कहानी है।
दृश्य बहुत खूबसूरत हैं, खासकर फूलों वाला सीन। लेकिन अंत इतना दुखद क्यों? अरबपति का रक्षक में प्रेम कहानी को इस तरह तोड़ना जरूरी था क्या? फिर भी, अभिनय शानदार है और निर्देशन भी प्रभावशाली है।
अरबपति का रक्षक की कहानी अधूरी लगती है, जैसे कोई सपना टूट गया हो। शुरू में जो उम्मीद थी, वह अंत में निराशा में बदल जाती है। फूलों का गुलदस्ता और फिर वह चीख... दिल को छू लेने वाला दृश्य है।