शुरुआत में लगता है कि दोनों महिलाएं किसी पुरानी दुश्मनी को निपटा रही हैं, लेकिन जब ताबूत में लेटे व्यक्ति का चेहरा दिखा, तो सब बदल गया। खाक हुआ इश्क़ की यह कहानी बताती है कि मौत के बाद भी रिश्तों के धागे कैसे उलझे रहते हैं। ब्लॉन्ड महिला का फोन पर चिल्लाना और ब्रूनेट का शांत रहना एक अजीब तनाव पैदा करता है जो दर्शक को बांधे रखता है।
जब स्क्रीन पर ग्रीन टिंट वाले सीसीटीवी फुटेज दिखाई दिए, तो रोंगटे खड़े हो गए। कोई तीसरा व्यक्ति इन सबको देख रहा था, यह एहसास कहानी को एक नया मोड़ देता है। खाक हुआ इश्क़ में दिखाया गया यह निगरानी वाला दृश्य बताता है कि अंत्येष्टि की निजी क्षण भी अब सुरक्षित नहीं हैं। उस काले कपड़ों वाली महिला का फोन कॉल रहस्य को और गहरा कर देता है।
दोनों पात्रों के बीच की नफरत इतनी गहरी है कि शव के सामने भी वे लड़ना बंद नहीं कर पा रही हैं। ब्लॉन्ड महिला का गुस्सा और ब्रूनेट का व्यंग्यात्मक अंदाज देखकर लगता है कि मरने वाले के जाने से कुछ सुलझा नहीं है। खाक हुआ इश्क़ की यह झलक दिखाती है कि इंसान अपने स्वभाव से कितना नहीं बदल पाता, चाहे सामने मौत ही क्यों न खड़ी हो।
कमरे का माहौल और खिड़की से आती रोशनी एक अजीब सी खामोशी बना रही है, जो इन दोनों के शोर से टकरा रही है। जब ब्लॉन्ड महिला फोन पर बात कर रही थी, तो ब्रूनेट की आंखों में एक अलग ही चमक थी। खाक हुआ इश्क़ में ऐसे दृश्य दर्शक को सोचने पर मजबूर कर देते हैं कि आखिर इनके बीच हुआ क्या था जो मौत भी इसे मिटा नहीं पाई।
वह महिला जो अंधेरे कमरे में सीसीटीवी देख रही थी, उसका चेहरा और हावभाव बहुत संदिग्ध थे। उसने फोन पर क्या कहा, यह जानने की उत्सुकता बढ़ जाती है। खाक हुआ इश्क़ की कहानी में यह किरदार एक मास्टरमाइंड लगता है जो सब कुछ कंट्रोल कर रहा है। उसकी मौजूदगी ने पूरे दृश्य को एक थ्रिलर का रूप दे दिया है।