इस दृश्य में जो तनाव दिखाया गया है वह रोंगटे खड़े करने वाला है। जब डॉक्टर ने वह अंग निकाला तो पूरा कमरा सन्न रह गया। खाक हुआ इश्क़ की कहानी में यह मोड़ बिल्कुल अप्रत्याशित था। पात्रों के चेहरे पर डर साफ झलक रहा था, खासकर उस लड़की की आंखों में जो जमीन पर गिरी हुई थी। यह सीन दर्शकों को बांधे रखने के लिए काफी है।
लाल साड़ी वाली लड़की का प्रवेश बिल्कुल किसी खूंखार खलनायक जैसा था। उसकी शांत मुद्रा और बाकी लोगों की घबराहट के बीच का कंट्रास्ट कमाल का था। खाक हुआ इश्क़ में ऐसे किरदार ही कहानी को आगे बढ़ाते हैं। जब वह बिना किसी भावना के खड़ी रही, तो लगा कि वह इस सबकी मास्टरमाइंड है। उसकी आंखों में एक अजीब सी चमक थी जो खतरनाक लग रही थी।
शुरुआत में लगा कि यह कोई मेडिकल इमरजेंसी है, लेकिन जैसे-जैसे सीन आगे बढ़ा, पता चला कि यह कुछ और ही खेल है। खाक हुआ इश्क़ के इस एपिसोड में डायलॉग से ज्यादा एक्शन पर फोकस किया गया है। जब वह आदमी जमीन पर तड़प रहा था और दूसरी तरफ चाकू की नोक पर एक लड़की थी, तो माहौल बहुत गंभीर हो गया। यह थ्रिलर से कम नहीं है।
बैग पर लिखा ह्यूमन ऑर्गन देखकर ही समझ गया कि यह कोई आम सर्जरी नहीं है। खाक हुआ इश्क़ में ऐसे सीन्स दिखाकर मेकर्स ने साबित कर दिया है कि वे रिस्क लेने से नहीं डरते। जब वह अंग प्लास्टिक बैग में डाला गया, तो एक अजीब सी घृणा और डर महसूस हुआ। यह सीन बताता है कि इंसानियत कितनी गिर सकती है जब लालच या मजबूरी हो।
जिस लड़की को चाकू की नोक पर रखा गया था, उसकी आंखों में जो खौफ था वह लाजवाब था। खाक हुआ इश्क़ के इस हिस्से में एक्टिंग बहुत नेचुरल लगी। जब वह आदमी उसके पीछे खड़ा होकर धमकी दे रहा था, तो लगा कि अब कुछ भी हो सकता है। दूसरी तरफ जमीन पर पड़ी लड़की की चीखें दिल दहला देने वाली थीं। यह सीन इमोशनल रूप से बहुत भारी था।