जब एक फिट लड़की दौड़ती है और बेघर लोग कचरे में खाना ढूंढते हैं, तो जीवन की विषमता साफ दिखती है। खाक हुआ इश्क़ जैसे ड्रामे में भी ऐसे ही मोड़ आते हैं जहां भावनाएं टूटती हैं। यहाँ तनाव इतना बढ़ जाता है कि लगता है सब कुछ बिखर जाएगा।
कचरे के डिब्बे से खाना निकालते हुए चेहरों पर जो खुशी और फिर गुस्सा दिखा, वो दिल दहला देने वाला था। खाक हुआ इश्क़ में भी ऐसे ही जज्बात होते हैं जब प्यार टूटता है। यहाँ तो भूख ने इंसानियत को भी खा लिया।
एक तरफ फिटनेस के लिए दौड़, दूसरी तरफ जिंदा रहने के लिए संघर्ष। खाक हुआ इश्क़ की तरह यहाँ भी दो दुनियाएं टकराती हैं। जब एक लड़की शांति से दौड़ती है और पीछे शोर मचता है, तो लगता है कि किस्मत कितनी अलग-अलग होती है।
खाने के टुकड़े के लिए इतना झगड़ा? हां, जब पेट खाली हो तो इंसान कुछ भी कर सकता है। खाक हुआ इश्क़ में भी प्यार के लिए ऐसे ही पागलपन दिखाए गए हैं। यहाँ तो भूख ने प्यार को भी पीछे छोड़ दिया।
जब एक लड़की चीखती है और दूसरा लड़का उसे मारने को तैयार हो जाता है, तो लगता है कि इंसानियत मर गई। खाक हुआ इश्क़ में भी ऐसे ही दर्दनाक पल आते हैं। यहाँ तो हर चेहरे पर दर्द साफ दिख रहा था।