जब वह काली पोशाक पहनकर सामने आई, तो लगा जैसे मौत ने रूप बदल लिया हो। चेहरे पर कोई पछतावा नहीं, बस एक ठंडी मुस्कान। खाक हुआ इश्क़ की कहानी में यह पल सबसे ज्यादा डरावना था। उसने बैग खोला, नोटों का ढेर देखा, और फिर भी आंखों में खालीपन था। क्या पैसा सब कुछ खरीद सकता है? शायद नहीं, क्योंकि उसकी आत्मा तो पहले ही बिक चुकी थी।
वह बैग सिर्फ कपड़े नहीं, बल्कि एक पूरा अपराध छिपाए हुए था। नोटों की गड्डियां देखकर लगा जैसे कोई सपना टूट रहा हो। खाक हुआ इश्क़ में यह दृश्य सबसे ज्यादा चौंकाने वाला था। उसने नोट गिने, फिर बैग बंद किया—जैसे कोई कब्र बंद कर रहा हो। क्या वह भाग रही थी या किसी को फंसाने की तैयारी कर रही थी? सवाल बेजवाब रहे।
उस लड़की के होंठों से खून बह रहा था, लेकिन उसकी आंखों में डर नहीं, बस एक अजीब सी चमक थी। खाक हुआ इश्क़ के इस मोड़ पर लगा जैसे कहानी उल्टी चल रही हो। क्या वह शिकार थी या शिकारी? जब वह मुस्कुराई, तो लगा जैसे मौत भी उसके कदमों में झुक गई हो। यह दृश्य देखकर रोंगटे खड़े हो गए।
कमरा सफेद था, लेकिन उसमें छिपा सच काला था। उसने बैग खोला, नोट निकाले, और फिर भी चेहरे पर कोई खुशी नहीं। खाक हुआ इश्क़ की यह विडंबना है—पैसा है, लेकिन सुकून नहीं। वह खिड़की के पास खड़ी थी, जैसे कोई रास्ता ढूंढ रही हो। लेकिन क्या भागने से सच छिप जाता है? शायद नहीं।
उसकी मुस्कान देखकर लगा जैसे सब कुछ ठीक है, लेकिन आंखों में एक तूफान छिपा था। खाक हुआ इश्क़ में यह पल सबसे ज्यादा दिल दहला देने वाला था। जब वह नोटों को छूती है, तो लगता है जैसे वह किसी की यादों को गिन रही हो। क्या पैसा उस दर्द को मिटा सकता है जो उसने झेला है? शायद नहीं।