सिद्धार्थ की आँखों की सर्जरी का पल बेहद इमोशनल था। जब उसने अपनी माँ और पापा को पहली बार देखा, तो उसकी खुशी देखकर दिल भर आया। नेटशॉर्ट ऐप पर डबिंग ३० साल जमे, ३ भाई पछताए देखना एक अलग ही अनुभव है। नव्या के गायब होने का राज़ अब खुलने वाला है, क्या वह सच में डोनर है? यह सस्पेंस मुझे बांधे रखता है।
फ्लैशबैक में छोटी नव्या का सिद्धार्थ से किया वादा बहुत प्यारा था। उसने कहा था कि वह उसे दुनिया दिखाएगी। शायद उसी वादे को निभाने के लिए उसने अपनी आँखें दान कर दीं। डॉक्टर का बयान कि नव्या को अस्थमा है, सबको झटका दे गया। क्या नव्या अब हमारे बीच नहीं है? यह कहानी रोंगटे खड़े कर देती है।
तीनों भाई सिद्धार्थ के लिए कितना सोचते हैं, यह देखकर अच्छा लगा। राज और रोहित का उसे हिम्मत देना और माँ-पापा का सहारा देना दिखाता है कि परिवार कितना अहम होता है। नेटशॉर्ट पर डबिंग ३० साल जमे, ३ भाई पछताए की कहानी में हर किरदार की गहराई है। अब सबकी नज़रें नव्या पर हैं, वह कहाँ है?
सिद्धार्थ की आँखें खुलती हैं और वह सबको देखकर खुश होता है, लेकिन असली ट्विस्ट तो तब आता है जब डॉक्टर नव्या की बीमारी का जिक्र करता है। सबके चेहरे पर डर साफ दिख रहा था। क्या नव्या ने अपनी जान देकर सिद्धार्थ को रोशनी दी? यह सवाल दिमाग में घूम रहा है। नेटशॉर्ट ऐप का कंटेंट सच में लाजवाब है।
सिद्धार्थ की माँ का रिएक्शन जब उसे पता चला कि नव्या शायद डोनर है, वह दिल दहला देने वाला था। एक माँ का दर्द और चिंता उसकी आँखों में साफ झलक रही थी। डबिंग ३० साल जमे, ३ भाई पछताए में इमोशन्स को बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है। नेटशॉर्ट पर यह सीरीज देखना मेरी दिनचर्या का हिस्सा बन गया है।