जब डॉक्टर ने ब्लड ग्रुप की बात की तो सबके होश उड़ गए। माँ बाप का ए है और बेटे का बी? यह कैसे संभव है? फिर पता चला कि वह गोद ली गई थी। डबिंग ३० साल जमे, ३ भाई पछताए में यह मोड़ दिल दहला देने वाला था। अस्पताल के कमरे में तनाव इतना था कि सांस लेना मुश्किल हो गया।
शुरुआत में वह रोहित से कहती है कि मैं तुम्हारी बहन हूं, लेकिन जब सच्चाई सामने आई तो उसने मान लिया कि वह असली बहन नहीं है। यह धोखा कितना गहरा था! डबिंग ३० साल जमे, ३ भाई पछताए में हर डायलॉग में दर्द था। उसकी आंखों में डर और शर्म दोनों साफ दिख रहे थे।
जब पता चला कि वह उनकी बेटी नहीं है, तो माँ की आवाज़ कांप गई। पिता ने कहा कि अनाथालय से डीएनए मिला था। यह सब सुनकर लगता है जैसे परिवार की नींव हिल गई हो। डबिंग ३० साल जमे, ३ भाई पछताए में भावनाओं का तूफान था। हर चेहरे पर सवाल था – अब क्या होगा?
रोहित जब बिस्तर के पास खड़ा होकर चिल्लाया – 'हमें सच बताओ!' तो उसकी आवाज़ में दर्द और गुस्सा दोनों था। उसे लगा कि उसकी बहन ने उसे धोखा दिया है। डबिंग ३० साल जमे, ३ भाई पछताए में यह सीन सबसे ज्यादा इमोशनल था। उसकी आंखों में आंसू और मुट्ठियां भिंची हुई थीं।
अस्पताल के कमरे में सब खड़े थे, डॉक्टर फाइल लेकर आया और सबकी सांसें रुक गईं। दीवारों पर लगी पेंटिंग्स भी जैसे चुपचाप यह ड्रामा देख रही थीं। डबिंग ३० साल जमे, ३ भाई पछताए में सेट डिजाइन बहुत रियलिस्टिक था। हर शॉट में तनाव महसूस होता था।