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(डबिंग) 30 साल जमे, 3 भाई पछताएवां50एपिसोड

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(डबिंग) 30 साल जमे, 3 भाई पछताए

"लगातार अपने तीन भाइयों का बुरा बर्ताव सहने के बाद, छोटी बहन इंसान को क्रायोप्रिज़र्व करने के एक प्रयोग में भाग लेती है, जिसमें उसे जमाकर तीस सालों के लिए सुला दिया जाता है. तीनों भाइयों को पछतावा होता है."
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इस एपिसोड की समीक्षा

नव्या की वापसी ने सबको हिला दिया

३० साल बाद जब नव्या लौटी, तो उसके चेहरे पर कोई पहचान नहीं थी। अर्जुन का चेहरा देखकर भी वह बोली - 'क्या मैं आपको जानती हूँ?' यह डबिंग ३० साल जमे, ३ भाई पछताए वाला मोड़ इतना दर्दनाक था कि आंखें नम हो गईं। विज्ञान सफल हुआ, पर इंसानियत टूट गई।

अर्जुन की मुस्कान अब टूट चुकी है

पहले वह खुशी से चमक रहा था, फिर नव्या के सवाल ने उसे जड़ से हिला दिया। उसकी आंखों में उम्मीद थी, पर नव्या की बेरुखी ने सब कुछ ध्वस्त कर दिया। डबिंग ३० साल जमे, ३ भाई पछताए में यह पल सबसे ज्यादा दिल तोड़ने वाला था। क्या प्यार भी समय के साथ मिट जाता है?

माँ का दर्द देखकर रोना आ गया

नव्या की माँ की आंखों में आंसू थे, पर वह मुस्कुरा रही थीं। फिर जब नव्या ने उन्हें पहचानने से इनकार किया, तो उनकी मुस्कान टूट गई। डबिंग ३० साल जमे, ३ भाई पछताए में यह दृश्य इतना भावुक था कि लगता है जैसे दिल टूट गया हो। माँ का प्यार कभी नहीं मरता, चाहे बच्चा कितना भी बदल जाए।

विज्ञान ने जीवन दिया, पर यादें छीन लीं

लैब में सब कुछ परफेक्ट था - ट्रांसप्लांट सफल, प्रक्रिया सही, पर नव्या की यादें गायब थीं। डबिंग ३० साल जमे, ३ भाई पछताए में यह विरोधाभास सबसे ज्यादा चुभता है। क्या इंसान सिर्फ शरीर है या यादें भी उसकी पहचान हैं? यह सवाल अब तक दिमाग में घूम रहा है।

नव्या की आंखों में अजनबीपन था

जब वह चमकते दरवाजे से बाहर आई, तो उसकी आंखों में कोई पहचान नहीं थी। अर्जुन, माँ, भाई - सबके सामने वह खड़ी थी, पर जैसे कोई अजनबी। डबिंग ३० साल जमे, ३ भाई पछताए में यह दृश्य इतना अजीब था कि लगता है जैसे समय ने सब कुछ निगल लिया हो।

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