कबीर की ताकत देखकर सब हैरान हैं। ट्रक का टायर बदलना कोई मज़ाक नहीं है, पर उसने बिना पसीने बहाए सब कर दिखाया। नारंगी सूट वाले को तो यकीन ही नहीं हो रहा। (डबिंग) बहको वाली आवाज़ में जो डायलॉग थे, वो भी कमाल के थे। कबीर असल में है कौन? यह सवाल सबके दिमाग में चल रहा है। काश मैं भी ऐसी स्किल सीख पाता।
जब कबीर ट्रक से उतरा, तो माहौल बदल गया। सब उसे हीरो की तरह देख रहे थे। डेनिम जैकेट वाली लड़की ने शुक्रिया कहा, पर काले कोट वाले आदमी की चाल अलग थी। उसने जाने से मना कर दिया। कार धोने वाले चाचा जैसे सादे कपड़ों में छिपा है असली हुनर। यह सीन दिल को छू गया।
टायर बदलने की स्पीड देखकर रोंगटे खड़े हो गए। कबीर ने साबित कर दिया कि वह सिर्फ ड्राइवर नहीं है। अमन भाई भी हैरान खड़े थे। जीत की खुशी में सब नाच रहे थे, पर कहानी में अभी ट्विस्ट बाकी है। काले कोट वाला किरदार रहस्यमयी लग रहा है। (डबिंग) बहको की तरह यह कहानी भी अनोखी है। नेटशॉर्ट पर ऐसे सीन देखना सुकून देता है।
कबीर की एंट्री धमाकेदार थी। लाल ट्रक और उसकी स्पीड सबके होश उड़ा गई। सफेद स्वेटर वाले लड़के ने कहा कि हम जीत गए, पर क्या सच में जीत मिल गई? कहानी में अभी उतार चढ़ाव बाकी हैं। (डबिंग) बहको के डायलॉग ने सीन को और मज़ेदार बना दिया। कबीर की आंखों में एक अलग ही चमक थी।
यह सीन दिखाता है कि हुनर कपड़ों से नहीं पहचाना जाता। कबीर सादे ओवरऑल में था, पर काम किसी इंजीनियर से कम नहीं था। नारंगी सूट वाला शख्स उसे हल्के में ले रहा था, पर अब चुप है। कार धोने वाले चाचा वाली मिस्ट्री अभी बनी हुई है। कबीर क्यों नहीं जाना चाहता? यह जानने के लिए अगला एपिसोड देखना होगा।
सबको लगा था कि सब खत्म हो गया, पर कबीर ने खेल पलट दिया। छह टायर बदलना आसान नहीं है। टीम वर्क भी कमाल का था। भूरे वेस्ट वाले ने भी मदद की। पर काले कोट वाले की जिद देखकर लग रहा है कि वह आसान नहीं मानने वाला। (डबिंग) बहको की लाइन फिर से गूंज रही है कानों में।
कबीर की चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचा रही है। जब सब उसे जाने को कह रहे थे, तो वह शांत खड़ा रहा। उसकी आंखों में एक अलग ही कहानी थी। शायद वह कुछ और साबित करना चाहता है। डेनिम जैकेट वाली लड़की की मुस्कान देखकर लगा कि सब ठीक हो जाएगा। कार धोने वाले चाचा जैसा वह सादा है। पर काले कोट वाला खतरा बना हुआ है।
ट्रक का सीन बहुत एक्शन से भरा था। धूल उड़ रही थी और सब भाग रहे थे। कबीर ने बिना डरे सब संभाल लिया। यह वही शख्स है जिसके बारे में सब शक कर रहे थे। कार धोने वाले चाचा जैसे सादगी में ही असली ताकत है। कबीर के किरदार में गहराई है जो धीरे धीरे खुल रही है।
जीत की खुशी देखकर अच्छा लगा। सब एक दूसरे को गले लगा रहे थे। पर कहानी का असली मोड़ तो अब आएगा। काले कोट वाले ने साफ कर दिया कि वह नहीं जाएगा। कबीर से उसकी नोकझोंक देखने लायक होगी। (डबिंग) बहको के अंदाज़ में डायलॉग डिलीवरी बहुत नेचुरल लग रही थी। बस यही उम्मीद है कि कबीर जीत जाए।
आखिरी में कबीर का डायलॉग कि मैं जा रहा हूँ? ने सबको चौंका दिया। वह रुकना चाहता है। शायद उसे अपनी सफाई देनी है या कोई और मकसद है। अमन भाई भी कन्फ्यूज हैं। यह सस्पेंस बनाए रखना आसान नहीं है। कार धोने वाले चाचा वाली उपमा बहुत फिट बैठती है इस किरदार पर। नेटशॉर्ट की स्टोरीटेलिंग कमाल की है।