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(डबिंग) बहको, कार धोने वाले चाचावां50एपिसोड

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(डबिंग) बहको, कार धोने वाले चाचा

पाँच साल पहले रेसिंग छोड़ चुका करण सिंह आज रामगढ़ कस्बे में एक मैकेनिक बनकर छिपा है। लेकिन जब रैप्टर रेसर्स गाँव वालों को चुनौती देते हैं और पूरे कस्बे का भविष्य दांव पर लग जाता है, तो करण के सामने सवाल है—चुप रहे या आखिरी बार रेस ट्रैक पर उतरे। क्या यह पूर्व चैंपियन अपने अतीत को पछाड़ पाएगा और अपने लोगों को बचा पाएगा?
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इस एपिसोड की समीक्षा

कबीर का असली हुनर

कबीर की ड्राइविंग देखकर लगता है जैसे वह सड़क पर हो। सिमुलेटर पर इतना जुनून कम ही देखने को मिलता है। अर्जुन उसकी नकल कर रहा है पर असली हुनर कबीर के पास है। पांच साल बाद भी उसकी पकड़ नहीं ढीली हुई है। यह मुकाबला देखते बन रहा है। सच में (डबिंग) बहको में ऐसा ही कुछ देखने को मिला था जो काफी रोमांचक था।

अर्जुन की रणनीति

अर्जुन मल्होत्रा की रफ़्तार तेज़ है लेकिन कबीर का अनुभव भारी पड़ रहा है। जब सबने खास मोड़ देखा तो सब हैरान रह गए। पुरानी दुश्मनी नए खेल में साफ झलक रही है। दल का समर्थन और रणनीति भी खेल का अहम हिस्सा बन गई है। बिल्कुल कार धोने वाले चाचा भी ऐसे मुकाबले की कल्पना नहीं कर सकते।

टक्कर का आदेश

राहुल मेहता को टक्कर मारने का आदेश मिलता है जो खेल के नियमों से बाहर लगता है। करण भाई की सलाह पर वह आगे बढ़ता है। खेल की दुनिया में भी दोस्ती और दुश्मनी साफ दिखती है। स्क्रीन पर जो एक्शन है वह असली दौड़ जैसा लग रहा है। वास्तव में ड्रिफ्टिंग के दृश्य बहुत शानदार हैं।

पुरानी दुश्मनी

बयांक बड़ी दौड़ की रेस टली हुई थी पर अब लगता है सब कुछ तय होगा। कबीर पांच साल बाद कैसे ड्राइव करेगा यह देखना दिलचस्प है। अर्जुन का कीर्तिमान टूटने वाला है या नहीं यह अभी कहना मुश्किल है। सिमुलेटर की सीट पर बैठकर भी पसीना आ रहा है। निश्चित रूप से (डबिंग) बहको के प्रशंसक को यह पसंद आएगा।

ड्राइविंग स्टाइल

कबीर सिंह के टक्कर जैसा ड्राइविंग स्टाइल किसी को नहीं भूलना चाहिए। व्हील को पकड़ने का तरीका ही बता रहा है कि वह माहिर है। दूसरे खिलाड़ी उसे हराने की कोशिश में लगे हैं। टायर जलना और हैंडब्रेक ड्रिफ्ट के पॉइंट्स बढ़ रहे हैं। सच्चाई यह है कार धोने वाले चाचा अगर यह देखें तो दंग रह जाएं।

इज्जत का सवाल

खेल में धोखा और चालें चलना आम बात है पर यहाँ सब खुलेआम हो रहा है। अर्जुन कहता है कि हार मान लो पर कबीर रुकने वाला नहीं है। प्रतियोगिता का माहौल बहुत तनावपूर्ण है। दर्शक भी स्क्रीन से चिपके हुए हैं। देखने में यह सिर्फ खेल नहीं बल्कि इज्जत का सवाल बन गया है।

प्रोफेशनल सेटअप

सिमुलेटर सेटअप बहुत प्रोफेशनल लग रहा है। स्टीयरिंग व्हील और पेडल असली कार जैसे हैं। कबीर और अर्जुन के बीच की प्रतिद्वंद्विता देखने लायक है। पुरानी बातें फिर से ताजा हो गई हैं। पांच साल पुरानी बात हो गई थी पर आज सब सामने है। लगभग (डबिंग) बहको में भी ऐसा ही ड्रामा था।

हिंसा का संकेत

राहुल मेहता को जल्दी से काम तमाम करने को कहा जाता है। खेल में हिंसा का संकेत मिलता है जो थोड़ा चौंकाने वाला है। कबीर संभल के ड्राइव कर रहा है। टकराव के दृश्य में जोश बढ़ जाता है। यह कार्यक्रम देखकर लगता है कि दौड़ सिर्फ स्पीड नहीं दिमाग भी है। स्पष्ट रूप से कार धोने वाले चाचा की कहानी से अलग यह एक्शन से भरा है।

नकल बनाम हुनर

अर्जुन मल्होत्रा ने कहा कि तुमने मुझे निराश नहीं किया। यह तारीफ भी है और चुनौती भी। कबीर का चेहरा बता रहा है वह कुछ बड़ा करने वाला है। खास मोड़ छोड़कर बाकी सब कॉपी कर रहा है। असली हुनर वही है जो नकल न हो। ध्यान से यह मुकाबला बहुत रोमांचक मोड़ ले रहा है।

धमाकेदार वापसी

अंत में सब हैरान हैं कि वह यह कैसे कर सकता है। कबीर की वापसी धमाकेदार हो रही है। कीर्तिमान टूटने के कगार पर हैं। दल में खलबली मची है। यह दृश्य देखकर खेल का शौक और बढ़ गया। अंततः (डबिंग) बहको जैसे कार्यक्रम के बाद यह नया अनुभव है। कार धोने वाले चाचा वाले सीन की याद नहीं आती यहाँ।