शुरू में धनुर्धर का आत्मविश्वास देखकर लगा सब ठीक है लेकिन जब तीर छूटा तो माहौल बदल गया। बंधे हुए कैदियों की आंखों में डर साफ दिख रहा था। बीच में सट्टेबाजी का दृश्य भी बहुत दिलचस्प था। लगता है यह सिर्फ अभ्यास नहीं था। नौ लोकों के देवता में ऐसे ट्विस्ट ही जान डालते हैं। कलाकार की आंखों के भाव कमाल के थे। मुझे यह शुरूआत बहुत पसंद आई। देखने वाले को बांधे रखता है।
टेबल पर बैठे लोगों की बातचीत से साफ था कि कुछ गड़बड़ होने वाली है। सिक्कों की आवाज और चेहरे के भाव बता रहे थे कि यह जुआ सिर्फ पैसों का नहीं है। भूरे वस्त्र वाले की चालाकी देखकर हैरानी हुई। जब सफेद पोशाक वाला आया तो सबकी हवा निकल गई। नौ लोकों के देवता की कहानी में यह मोड़ बहुत भारी था। मैं भी सोच में पड़ गया कि अब क्या होगा। रोमांच बढ़ गया।
अचानक दरवाजे टूटे और पत्ते हवा में उड़ने लगे यह दृश्य फिल्मी था। सफेद पोशाक वाले के प्रवेश ने सबका ध्यान खींच लिया। उसकी आंखों में एक अलग ही ठंडक थी। पीछे खड़े लोग डर गए थे। ऐसा लगा जैसे कोई तूफान आ गया हो। इस मंच पर यह सीन देखने का मजा ही अलग था। नौ लोकों के देवता का यह एपिसोड याद रहेगा। बहुत रोमांचक लगा। दिल धक धक हुआ।
उसके कंधे पर लगे सुनहरे हथियार बहुत भव्य लग रहे थे। वह बिना कुछ बोले ही सब पर हावी हो गया। हरे वस्त्र वाले का चेहरा उतर गया था। यह शक्ति संतुलन बहुत अच्छे से दिखाया गया है। परिधान डिजाइनर को सलाम। नौ लोकों के देवता में ऐसे किरदार ही कहानी को आगे बढ़ाते हैं। मुझे यह किरदार सबसे ज्यादा पसंद आया। शानदार प्रस्तुति थी। आंखें नहीं हटीं।
लकड़ी के खंभों से बंधे लोगों की हालत देखकर दिल दहल गया। वे कुछ बोल नहीं सकते थे बस इशारों में दर्द दिखा रहे थे। जब तीर पास से गुजरा तो उनकी चीख निकल गई। यह क्रूरता क्यों जरूरी थी। शायद इसका जवाब आगे मिलेगा। नौ लोकों के देवता में ऐसे दर्दनाक दृश्य भी हैं जो रुला देते हैं। बहुत इमोशनल हो गया मैं। दिल पर चोट लगी। आंसू आ गए।
पहले वह बहुत हंस रहा था लेकिन मुख्य किरदार के प्रवेश के बाद उसका चेहरा बदल गया। उसने उंगली उठाई लेकिन आवाज नहीं निकली। सत्ता का नशा उतर गया था। कलाकार ने यह बदलाव बहुत अच्छे से निभाया है। हास्य से डर तक का सफर छोटा था। नौ लोकों के देवता के खलनायक भी ऐसे ही होने चाहिए। मजा आ गया देखकर। बहुत बढ़िया अभिनय था। तालियां बजानी चाहिए।
लगा था धनुर्धर ही मुख्य है लेकिन असली खेल तो सफेद पोशाक वाले के आने से शुरू हुआ। सबकी उम्मीदें टूट गईं। यह अनिश्चितता ही नाटक की जान है। मैं भी सोच रहा था कि अब क्या होगा। इस मंच पर ऐसे दृश्य बार बार देखने को मिलते हैं। नौ लोकों के देवता ने फिर सबको चौंका दिया। अगला भाग कब आएगा। बेसब्री से इंतजार है। रात भर जागूंगा।
उसकी पोशाक के कंधे पर लगे डिजाइन बहुत यूनिक थे। यह साधारण योद्धा नहीं लग रहा था। शायद कोई राजकुमार या देवता हो। रोशनी में जब वह चमका तो सबकी आंखें चौंधिया गईं। दृश्य प्रभाव भी बढ़िया थे। नौ लोकों के देवता की निर्माण गुणवत्ता बहुत हाई है। ऐसे दृश्य बड़े पर्दे जैसे लगते हैं। बहुत शानदार लगा। आंखों को सुकून मिला। बार बार देखूंगा।
वह कुछ बोल नहीं रहा था बस देखता रहा। उसकी आंखों में चिंता साफ थी। शायद वह जानता था कि यह होने वाला है। दोस्तों के बीच की यह खामोशी सबसे तेज शोर थी। अभिनय बहुत स्वाभाविक लगा। नौ लोकों के देवता में हर किरदार का अपना वजन है। मुझे यह मौन अभिनय बहुत पसंद आई। सच्चा प्रतिभा है। दिल को छू गया। गहरा असर हुआ।
जब वह आगे बढ़ा तो सब रास्ता देने लगे। हवा में पत्ते गिर रहे थे और सन्नाटा था। यह चरमोत्कर्ष बहुत शक्तिशाली था। लगता है अब बदलाव आएगा। सभी किरदारों की जगह बदल गई है। इस मंच पर यह श्रृंखला देखना बनता है। नौ लोकों के देवता का यह दृश्य मेरा पसंदीदा हो गया। बहुत दमदार अंत था इसका। रुह कांप गई। सांस रुक गई।